ईरान-अमेरिका युद्ध का सच जानने के लिए 28 फरवरी की उस रात पर वापस जाना होगा जब ईरान पर सर्जिकल स्ट्राइक हुई। आयतुल्लाह खमीनी समेत शीर्ष नेतृत्व के 40 लोगों को मार गिराया गया। उस वक्त लगा कि ईरान की कहानी यहीं खत्म हो जाएगी। लोग सड़कों पर आएंगे, क्रांति आएगी, सत्ता पलट होगी और ट्रंप खुद को विजेता घोषित कर देंगे।
लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि एक महीना बीतने को है और तस्वीर बिल्कुल उलटी दिख रही है। अमेरिका को पीछे धकेला जा चुका है। ईरान यह तय कर रहा है कि युद्ध होगा या नहीं, सीजफायर होगा या नहीं। और ट्रंप एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां से आगे भी मुश्किल है और पीछे भी।
तो सवाल यह है कि क्या ईरान यह युद्ध जीत सकता है?
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: जीत का मतलब क्या है?
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच समझने के लिए पहले यह तय करना होगा कि जीत का मतलब क्या है।
ईरान की जीत का मतलब यह नहीं है कि ईरान के नेता वाशिंगटन डीसी जाकर अपना परचम लहराएंगे। ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि ईरान की जीत बहुत सिंपल है। कुछ नेतृत्व बचा रहे। कमांड और कंट्रोल का ढांचा बरकरार रहे। बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार जब चाहे इस्तेमाल हो सके। जहां चाहे हमला हो सके। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बना रहे। वैश्विक अर्थव्यवस्था को जब चाहें दबाया जा सके।
तकनीकी दृष्टि से देखें तो ईरान इस वक्त यह युद्ध जीत रहा है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: ट्रंप की उलझन
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच तब और साफ हो जाता है जब हम ट्रंप के व्यवहार को देखते हैं। एक दिन वो ईरानियों की तारीफ कर रहे हैं। दूसरे दिन धमकी दे रहे हैं कि दो दिन में होर्मुज खोलो नहीं तो खत्म कर दूंगा। तीसरे दिन कहते हैं कि ईरान तो चाहता है कि मैं उनका आयतुल्लाह बन जाऊं।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि ट्रंप का यह भ्रमित व्यवहार खुद बताता है कि अमेरिका कितनी मुश्किल स्थिति में है। ट्रंप ने अपने 15 सूत्री शांति प्रस्ताव पेश किए। ईरान ने उन्हें सीधे ठुकरा दिया। कोई बातचीत नहीं, कोई संवाद नहीं।
ईरान ने साफ कह दिया है कि अगर अमेरिका ने जमीन पर सैनिक उतारे तो वो संयुक्त अरब अमीरात पर हमला करेगा। बहरीन पर हमला करेगा। सीरिया में जहां अमेरिकी फौजें रुकी हैं वहां भी हमला होगा। जो भी देश अमेरिका के जमीनी आक्रमण को समर्थन देगा, उसे कब्जे में ले लिया जाएगा।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: ईरान की तैयारी
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच जानना हो तो देखिए कि ईरान इस युद्ध को किस रफ्तार से फैला रहा है। IRGC ने 10 लाख लड़ाकू जुटाए हैं। यहां तक कि 12 साल के बच्चों को भी युद्ध में शामिल होने की अनुमति दे दी गई है।
ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के 13 ठिकाने खत्म कर दिए हैं। वहां अमेरिकी फौज काम नहीं कर सकती। जो अमेरिकी बचे हैं वो होटलों में, नागरिक इलाकों में छुप रहे हैं। IRGC ने धमकी दी है कि आने वाले घंटों में वो उन होटलों पर भी हमला करेगा जहां अमेरिकी सेना छुपी है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि ट्रंप ने ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी का जो प्लान था उसे भी 10 दिन के लिए टाल दिया है। नई डेडलाइन 6 अप्रैल है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: अगर ईरान बच गया तो क्या होगा?
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि इस युद्ध का नतीजा पूरी दुनिया के शक्ति संतुलन को हिला सकता है। अगर ईरान इसी तरह बचा रहता है, इस्लामी गणतंत्र टिका रहता है, IRGC नेतृत्व करती रहती है, तो अमेरिका पर क्या असर पड़ेगा? इसे समझना जरूरी है।
पहला असर: पेट्रोडॉलर का क्षरण
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि अमेरिकी वर्चस्व का सबसे बड़ा आधार है पेट्रोडॉलर व्यवस्था। जब तेल की कीमतें इतनी अस्थिर होंगी और अमेरिका पर भरोसा इतना कम होगा तो खाड़ी के देश सुरक्षा की गारंटी कहीं और ढूंढेंगे। वो रूस से बात करेंगे। चीन को युआन में तेल बेचेंगे। धीरे-धीरे अमेरिका की वित्तीय सर्वोच्चता खत्म होती जाएगी।
दूसरा असर: खाड़ी सहयोगियों का अमेरिका से मोहभंग
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह भी है कि खाड़ी के देशों को पहले ही समझ आ गया है कि अमेरिका पर अपनी सुरक्षा के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता। सऊदी अरब, UAE जैसे देश वाशिंगटन से ध्यान हटाकर दूसरे देशों की तरफ मुड़ेंगे। इससे अमेरिका की खाड़ी में सैन्य मौजूदगी सीमित होती जाएगी।
तीसरा असर: ईरान का परमाणु कार्यक्रम तेज होगा
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि ईरान के पास पहले से समृद्ध यूरेनियम है जिसे ट्रंप नष्ट नहीं कर पाए। अब ईरान दोगुनी रफ्तार से अपनी परमाणु क्षमता फिर से बनाएगा। इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी क्योंकि सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र भी कहेंगे कि हमारे पास भी परमाणु विकल्प होना चाहिए। परमाणु अप्रसार व्यवस्था और कमजोर होती जाएगी।
चौथा असर: प्रॉक्सी नेटवर्क की वापसी
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि हिजबुल्लाह, हूती, हमास, इराकी मिलिशिया, ये सब वापस आएंगे और पहले से ज्यादा ताकत के साथ। रूस और चीन इन्हें हथियार भी देंगे। तब अमेरिकी और इजराइली हितों पर, खाड़ी में जहाजरानी पर छोटे-मोटे हमले अनिश्चितकाल तक चलते रहेंगे।
पांचवां असर: रणनीतिक विचलन
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि अगर अमेरिका इस युद्ध में उलझा रहा तो चीन प्रशांत महासागर में अपनी मनमानी करेगा। अमेरिके विमानवाहक पोत समूह पहले से ही खिंचे हुए हैं। तो चीन को ताइवान पर कब कार्रवाई करनी है, इसका सबक वो अभी सीख रहा है। जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया जो अमेरिका पर निर्भर थे, उन्हें दूसरी जगह देखना पड़ेगा।
छठा असर: अमेरिका में घरेलू बगावत
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह भी है कि अमेरिका में पेट्रोल के दाम पहले से बढ़ रहे हैं। अगर जमीन पर सैनिक उतारे गए तो हताहत तय हैं। इससे अमेरिकी जनता और ट्रंप विरोधी हो जाएगी। मध्यावधि चुनावों में बदलाव हो सकता है। डेमोक्रेट ज्यादा ताकतवर हो जाएंगे। कांग्रेस फंडिंग काट देगी। जैसा वियतनाम और अफगानिस्तान में हुआ, अमेरिका को जबरन पीछे हटना पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: जमीनी हमले की चुनौती
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि हवाई हमले और जमीनी हमले में जमीन-आसमान का फर्क है। ऊंचाई से बम गिराना अलग बात है, सैनिकों को जमीन पर उतारना बिल्कुल अलग।
ईरान की भूगोल एक दुःस्वप्न है
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच समझने के लिए ईरान का भूगोल समझना होगा। ईरान इराक से चार गुना बड़ा है। 8 करोड़ लोग रहते हैं। जगरोस और अल्बोरज पर्वत श्रृंखलाएं देश के 50 प्रतिशत हिस्से को ढकती हैं। जो शहर हैं, जो परमाणु ठिकाने हैं, वो अंदरूनी इलाकों में हैं। उन तक पहुंचने के लिए संकरे रास्तों से गुजरना होगा जो स्वाभाविक मारक क्षेत्र बन सकते हैं। इराक की तरह यहां समतल रेगिस्तान नहीं है। यह पहाड़ी और रेगिस्तानी इलाकों का मिश्रण है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि अमेरिकी योजनाकार जानते हैं कि यहां वही समस्या होगी जो इराक को 1980 में हुई थी और रोमन सेनाओं को 2000 साल पहले हुई थी।
खर्ग द्वीप की योजना भी कागजी
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि एक विचार यह है कि खर्ग द्वीप पर कब्जा करके ईरान के तेल को रोक दिया जाए। लेकिन यह भी व्यावहारिक नहीं है। हमला करने वाली टुकड़ियां छापा मार सकती हैं, लेकिन अगर ईरान के अंदर टिके रहना है, लंबी मुहिम चलानी है, तो एक मजबूत रसद श्रृंखला चाहिए। और ईरान ने साफ कहा है कि जो देश यह रसद श्रृंखला देगा, उसी पर हमला होगा। इसलिए कोई भी पड़ोसी देश अमेरिका को यह सुविधा नहीं देगा।
IRGC की मूसा जैसी रणनीति
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि IRGC की रणनीति इराकी सेना जैसी नहीं है जो ध्वस्त हो जाए। IRGC की मूसा रणनीति स्वतंत्र नियंत्रण और विकेंद्रीकृत कमांड पर आधारित है। हर स्थानीय कमांडर अपने विवेक से फैसला लेता है। तेहरान से आदेश का इंतजार नहीं। यही असममित युद्ध है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि ईरान ने 40 साल इसी दिन की तैयारी की है। ईरान-इराक युद्ध, सीरिया युद्ध, प्रॉक्सी अनुभव, सबसे सीखा है। गुरिल्ला युद्ध के सामने सीमित जमीनी मौजूदगी बुरी तरह हारेगी।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: ईरान को जीत के लिए अमेरिका जाने की जरूरत नहीं
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है। ईरान को युद्ध जीतने के लिए अमेरिका को हराने की जरूरत नहीं है। बस भारी कीमत चुकवानी है।
होर्मुज पर बारूदी सुरंगें बिछा दो। अमेरिकी ठिकानों पर हमला करो और भागो। प्रॉक्सी के जरिए क्षेत्र में हमले कराओ। अगर कुछ विशेष बल के सैनिक भी मारे जाएं तो अमेरिका में हाहाकार मच जाएगा। ड्रोन और स्नाइपर हर जगह हैं। वैश्विक जहाजरानी खोलना नामुमकिन हो जाएगा।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि यही वो रणनीति है जो ईरान अपना रहा है और अभी तक काम कर रही है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: रूस और चीन का खेल
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच सिर्फ दो देशों का मामला नहीं है। रूस बैठकर मुस्कुरा रहा है। एक महीने में उसका तेल राजस्व 24 अरब डॉलर हो गया है, दोगुना। जब दुनिया में तेल की आपूर्ति अनिश्चित होती है, रूस को फायदा होता है।
चीन चुपचाप नोट्स ले रहा है। अमेरिका क्या कर सकता है, क्या नहीं। उसकी क्षमताएं कहां तक हैं। जब वो ताइवान पर कार्रवाई करे तो अमेरिका कुछ न कर पाए।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि यह युद्ध वास्तव में एक बड़े भूराजनीतिक खेल का हिस्सा है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: हूती और लाल सागर
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच अरब की खाड़ी तक सीमित नहीं है। हूती भी कह रहे हैं कि वो लाल सागर फिर से बंद करने वाले हैं। अगर लाल सागर और होर्मुज दोनों बंद हो गए तो वैश्विक सप्लाई चेन पर जो असर पड़ेगा वो बेमिसाल होगा।
तेल, कच्चा माल, सप्लाई चेन, सब टूट रहे हैं। कंपनियां एक देश से दूसरे देश भाग रही हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: इजराइल का अपना एजेंडा
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह भी है कि इजराइल और अमेरिका के इस युद्ध में अलग-अलग मकसद हैं। नेतन्याहू ने ट्रंप को बड़े-बड़े सपने दिखाए कि सत्ता पलट हो जाएगी। वो नहीं हुआ।
लेकिन इजराइल रुकने वाला नहीं क्योंकि उसे अपने अस्तित्व का सवाल है। उसे पता है कि अगर ईरान इस बार बच गया तो उसका जीना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए इजराइल युद्ध को और खींचना चाहता है।
और ट्रंप अब फंस चुके हैं। पीछे हटें तो अमेरिका की साख खत्म। आगे बढ़ें तो कीमत अनिश्चित।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि आईडीएफ के प्रमुख खुद कह रहे हैं कि इजराइल की सेना ध्वस्त हो सकती है क्योंकि उसके पास जनशक्ति कम हो रही है। इतनी आर्थिक मदद और समर्थन के बावजूद इजराइल अपनी सीमाएं महसूस कर रहा है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच और भारत
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच भारत के लिए भी बहुत मायने रखता है। तेल की कीमतों में उछाल की तैयारी करनी होगी। सरकार ने अभी तेल पर ड्यूटी कम की है, इसलिए अभी पेट्रोल पंप पर कीमतें स्थिर हैं। लेकिन चुनाव के बाद क्या होगा यह कोई नहीं जानता।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि जब दुनिया में इस तरह का उथल-पुथल होता है तो एक जगह ताकत गिरती है और कहीं नई शक्ति उभरती है। इस बार वो नई शक्ति भारत भी हो सकता है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: अमेरिका का साम्राज्य और अफगानिस्तान का सबक
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच जानने के लिए अफगानिस्तान को याद करना जरूरी है। अफगानिस्तान को साम्राज्यों का कब्रिस्तान कहा जाता है। अंग्रेज आए, रूस ने कोशिश की, अमेरिका ने 20 साल लगाए। सब सोचते रहे कि अफगानिस्तान पर काबू कर लेंगे। लेकिन वहां के लोगों ने कहा कि हम मर जाएंगे लेकिन किसी को अपने ऊपर नहीं बैठने देंगे।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि ईरान अमेरिकी साम्राज्य का कब्रिस्तान भी साबित हो सकता है। IRGC के कमांडर खुलेआम कह रहे हैं कि वो इसे अमेरिकियों के लिए कब्रिस्तान बनाकर रखेंगे।
ईरान को युद्ध जीतने की जरूरत नहीं। बस अमेरिका को इतनी कीमत चुकवानी है कि वो पीछे हटने पर मजबूर हो जाए।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच: आगे क्या?
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि यह युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। एक और भीषण चरण की ओर बढ़ता दिख रहा है।
ट्रंप का एनर्जी प्लांट पर हमले का प्लान टला है। 6 अप्रैल नई डेडलाइन है। पेंटागन 10,000 सैनिक भेजने पर सोच रहा है लेकिन रुक रहा है। वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान का इतिहास सामने है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का सच यह है कि रूस और चीन बड़े ध्यान से देख रहे हैं कि अमेरिका कितना खिंचा हुआ है, कितना कमजोर है। और इन्हीं नोट्स के आधार पर वो अपनी अगली चाल चलेंगे।
जो एक बात बिल्कुल साफ है वो यह है कि ईरान-अमेरिका युद्ध का सच सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है। यह उस विश्व व्यवस्था की परीक्षा है जिसे अमेरिका ने दशकों में बनाया। और इस परीक्षा का नतीजा दुनिया भर के शक्ति समीकरणों को हमेशा के लिए बदल सकता है।
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