पेट्रोल संकट का सच: चोरी, कालाबाजारी और देश को बचाने के उपाय

पेट्रोल संकट का सच: चोरी, कालाबाजारी और देश को बचाने के उपाय

पेट्रोल संकट का सच जानने से पहले एक वीडियो का जिक्र जरूरी है। एक शख्स ने एक टैंक में लगभग 700 लीटर पेट्रोल भरवाया। 700 लीटर। कोई अपनी निजी जरूरत के लिए इतना पेट्रोल नहीं लेता। यह पेट्रोल भविष्य में काले बाजार में बेचा जाएगा, उन लोगों को जिन्हें असल में इसकी जरूरत है।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि जब देश किसी मुश्किल में होता है तो कुछ लोगों का असली चेहरा सामने आ जाता है। कोई कुकर लेकर आया, कोई बाल्टी, कोई पानी का टैंक। लोग दूध के बर्तनों में पेट्रोल भरकर घर ले जा रहे हैं। और यह सब वो खुद वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं क्योंकि उन्हें पूरा यकीन है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

पेट्रोल संकट का सच: खतरे की असल तस्वीर

पेट्रोल संकट का सच जब पूरी तरह सामने आता है तो पता चलता है कि जो लोग इस तरह पेट्रोल जमा कर रहे हैं वो न सिर्फ कानून तोड़ रहे हैं बल्कि अपनी जान को भी खतरे में डाल रहे हैं।

पेट्रोल एक बेहद वाष्पशील तरल पदार्थ है। इसका क्वथनांक बहुत कम होता है और यह कमरे के तापमान पर भी भाप बनकर उड़ने लगता है। जब पेट्रोल गाड़ी की टंकी में होता है तो हवा से उसका संपर्क बहुत कम रहता है। लेकिन बाल्टी या कुकर में पेट्रोल हर वक्त हवा के संपर्क में रहता है।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि जो लोग इस तरह पेट्रोल चुरा रहे हैं उनका आधा पेट्रोल तो भाप बनकर उड़ जाएगा। और वो भाप नीचे की तरफ एक अदृश्य परत बना लेती है क्योंकि पेट्रोल की भाप सामान्य हवा से भारी होती है। ऐसे में अगर कोई माचिस जलाए तो विनाशकारी आग लग सकती है।

मतलब साफ है, पेट्रोल चोरी करने वाले तीन तरफ से नुकसान उठा रहे हैं। कानूनी नुकसान, आर्थिक नुकसान, और आग की जानलेवा संभावना।

पेट्रोल संकट का सच: कानून क्या कहता है?

पेट्रोल संकट का सच समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कानून इस बारे में क्या कहता है।

पेट्रोल और डीजल आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में आते हैं। इसीलिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत इन वस्तुओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। आवश्यक वस्तुओं की अवैध जमाखोरी करने पर सात साल तक की जेल हो सकती है। BNS की धारा 287 के तहत ज्वलनशील पदार्थों के साथ लापरवाही भरा बर्ताव करने पर छह महीने तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

पेट्रोल संकट का सच यह भी है कि जो पेट्रोल पंप इस तरह खुला पेट्रोल बेचता है वो पेट्रोलियम नियम 2002 का उल्लंघन करता है और उसका लाइसेंस रद्द हो सकता है। यानी खरीदने वाला और बेचने वाला, दोनों दोषी हैं।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि 235 लीटर पेट्रोल और 50 लीटर डीजल गैरकानूनी तरीके से जमा करके रखने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। यह सब काले बाजार में बेचा जाना था। अगर ऐसा चलता रहा तो जल्द ही पेट्रोल लेने के लिए पैन कार्ड और आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य हो जाएगा और सीमित मात्रा में ही पेट्रोल मिलेगा।

पेट्रोल संकट का सच: दुनिया में कहीं और भी

पेट्रोल संकट का सच को सही परिप्रेक्ष्य में रखना जरूरी है। कुछ पाकिस्तानी प्रचार खातों ने भारत के पेट्रोल पंप पर हुई घटनाओं के वीडियो पूरी दुनिया में फैलाए। लेकिन सच यह है कि संकट की स्थिति में लोगों का ऐसा व्यवहार सिर्फ भारत में नहीं होता।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि ऑस्ट्रेलिया में भी लोग पेट्रोल भरवाने के बाद बिना पैसे दिए भाग जाते हैं। ब्रिटेन में एक महिला ने अपनी कार में पेट्रोल भरवाया और एक बैग में अतिरिक्त पेट्रोल भर लिया। पाकिस्तान में तो 100 मिलीलीटर की बोतलों में पेट्रोल बेचा जा रहा है। कुछ बुरे लोगों की वजह से पूरा देश बुरा नहीं हो जाता।

पेट्रोल संकट का सच: LPG की काली दुनिया

पेट्रोल संकट का सच सिर्फ पेट्रोल तक सीमित नहीं है। LPG यानी रसोई गैस के संकट ने भी इसी तरह अपराधियों को मौका दे दिया।

पेट्रोल संकट का सच की तरह LPG संकट का सच भी यही है कि एक अच्छे संकट को अपराधी बर्बाद नहीं जाने देते।

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गैरकानूनी तरीके से LPG जमा करने और रीफिल करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया। चार लोग गिरफ्तार हुए। उनके पास से 183 सिलेंडर बरामद हुए। झांसी में 524 गैरकानूनी सिलेंडर जब्त किए गए जिनकी कीमत 18 लाख रुपये थी। तिरुपति में एक गैस एजेंसी ने जानबूझकर 822 सिलेंडर जमा कर रखे थे जिससे नकली कमी पैदा हुई और कीमतें बढ़ गईं। तमिलनाडु में भी 200 सिलेंडर जब्त हुए।

उत्तर से दक्षिण तक जो भी इस संकट का फायदा उठा सकता है वो उठा रहा है।

पेट्रोल संकट का सच और LPG संकट का सच मिलाकर यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस को पहले से पता नहीं था? और अगर पता था तो संकट से पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या इन रैकेटों में स्थानीय नेताओं और पुलिसवालों का हिस्सा नहीं था? LPG सिलेंडर कोई हीरे की अंगूठी नहीं जिसे कहीं छुपाकर रखा जाए। इसके लिए स्टोरेज एरिया चाहिए जो लोगों की नजर में आता ही है।

पेट्रोल संकट का सच: भारत ने क्या गलतियां कीं?

पेट्रोल संकट का सच यह भी है कि इस स्थिति के लिए हम खुद भी जिम्मेदार हैं।

पहली गलती, कोविड के बाद युद्ध स्तर पर रणनीतिक भंडार नहीं बढ़ाए। भारत के पास 70-80 दिनों का ईंधन भंडार था लेकिन इसे बढ़ाना जरूरी था।

दूसरी गलती, ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता पर जोर नहीं दिया। बायोगैस जैसे समाधान मौजूद हैं जिनसे भारत के कचरे को कम किया जा सकता है और ऊर्जा भी मिल सकती है। लेकिन आयात को कम करने पर किसी का ध्यान नहीं गया।

तीसरी गलती, संकट के समय भी रोडशो, चुनाव और रैलियां होती रहीं। सरकार दिखाना चाहती थी कि कोई समस्या नहीं है। लेकिन अगर अभी समस्या छुपाओगे और बाद में ईंधन आपातकाल घोषित करना पड़े तो जनता नाराज होगी।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि राजनीतिक नेताओं के बड़े-बड़े काफिले, अनावश्यक यात्राएं और सभी तरफ की चुनावी रैलियां, यह सब इस संकट में तेल डालने का काम करती हैं।

पेट्रोल संकट का सच: मीडिया की जिम्मेदारी

पेट्रोल संकट का सच यह भी है कि मीडिया ने घबराहट फैलाने में अहम भूमिका निभाई।

दस दिनों में पेट्रोल खत्म होने वाला है, यह पूरी तरह झूठ था। ईरान ने भारत को अपना दोस्त मानते हुए भारतीय जहाजों को आगे जाने की अनुमति दे दी। भारतीय LPG वाहक जहाज होर्मुज की खाड़ी से गुजर रहे थे और भारतीय नौसेना खुद इन टैंकरों की सुरक्षा कर रही थी।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि जब नौसेना के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर ईंधन के टैंकरों की सुरक्षा कर रहे हों और देश में लोग पेट्रोल चुराकर उसे बर्बाद कर रहे हों तो उन जवानों को कैसा लगेगा?

मीडिया आपको कभी नहीं बताएगा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें, बस से जाएं, मेट्रो लें। मीडिया में समाधान बताने से व्यूज नहीं मिलते। व्यूज घबराहट फैलाने से मिलते हैं।

पेट्रोल संकट का सच: व्यक्तिगत समाधान

पेट्रोल संकट का सच जानने के बाद अब बात करते हैं कि हम खुद क्या कर सकते हैं।

कम दूरी के लिए पैदल चलें या साइकिल इस्तेमाल करें। ज्यादा दूरी के लिए मेट्रो, बस या कोई भी सार्वजनिक परिवहन लें। अगर गाड़ी का इस्तेमाल बहुत जरूरी हो तो कारपूलिंग करें। चार लोग एक साथ ऑफिस आएं तो ट्रैफिक कम होगा और पैसे बचेंगे।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि छोटी-छोटी बातें बड़ा फर्क डालती हैं। सिग्नल पर 30 सेकंड से ज्यादा रुकें तो इंजन बंद करें। टायर का प्रेशर सही रखें ताकि ज्यादा ईंधन न जले। अगर कई गाड़ियां हैं तो सबसे कम ईंधन खाने वाली गाड़ी इस्तेमाल करें।

LPG बचाने के लिए खाना बनाते वक्त बर्तनों को ढककर रखें ताकि गर्मी बर्बाद न हो। गीले बर्तनों को सीधे गैस पर न चढ़ाएं, पानी सुखाने में गैस बर्बाद होती है। फ्रिज से निकाली चीजें पहले कमरे के तापमान पर आने दें फिर गैस पर चढ़ाएं। गैस के छेद साफ रखें, अगर नीली की जगह लाल लौ दिख रही है तो गैस बर्बाद हो रही है।

पेट्रोल संकट का सच: सरकारी स्तर के समाधान

पेट्रोल संकट का सच यह है कि व्यक्तिगत प्रयास काफी नहीं हैं, सिस्टम में बदलाव भी चाहिए।

पेट्रोल पंपों पर कार्रवाई हो ताकि लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल न खरीद पाएं। वो उद्योग जो घर से काम कर सकते हैं उनके लिए हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य हो। ऑफिस का समय एक या दो घंटे आगे-पीछे करने से ट्रैफिक में कमी आएगी और ईंधन की बर्बादी कम होगी।

पेट्रोल संकट का सच यह भी है कि पहले कैब एग्रीगेटर पूल या शेयरिंग कैब का विकल्प देते थे। वो चुपके से हटा दिया गया। इसे वापस लाना होगा।

दीर्घकालिक समाधान के रूप में परिवहन का विद्युतीकरण जरूरी है। लेकिन पूरे देश का EV बुनियादी ढांचा अभी भरोसेमंद नहीं है। जब तक विश्वसनीय EV चार्जिंग सिस्टम नहीं बनेगा लोग इस तरफ नहीं जाएंगे।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि इंडियन ऑयल का सूर्य नूतन इनडोर सोलर कुकिंग सिस्टम एक दिलचस्प समाधान है जो दिन में सौर ऊर्जा से और रात में बिजली से चल सकता है। 2022 में मंत्रियों को इसका प्रदर्शन दिखाया गया था। लेकिन उसके बाद क्या हुआ? कोई अमल नहीं। कोई नीति नहीं।

पेट्रोल संकट का सच: असली समस्या क्या है?

पेट्रोल संकट का सच यह है कि भारत एक ऊर्जा निर्भर देश है और हमेशा से रहा है। लेकिन किसी ने भी इस निर्भरता की जड़ को हल करने की कोशिश नहीं की।

हमने हमेशा इस बात पर ध्यान दिया कि यहां से आयात करें या वहां से। किसी ने यह नहीं पूछा कि आयात को पूरी तरह कैसे खत्म करें।

बायोगैस एक बड़ा समाधान है जो कचरे को कम करता है और ऊर्जा देता है। लेकिन इस पर गंभीरता से काम नहीं हुआ।

पेट्रोल संकट का सच यह भी है कि इस देश में समस्याओं पर दिलचस्पी है लेकिन समाधानों पर नहीं। ईरान और अमेरिका के बीच जंग हो और हम क्रिकेट या फिल्मों में उलझे रहें। लेकिन अगर लॉकडाउन जैसी स्थिति से बचना है तो स्वार्थी बनना बंद करना होगा।

पेट्रोल संकट का सच: देश के असली दुश्मन कौन?

पेट्रोल संकट का सच की इस पूरी कहानी में एक बात बहुत साफ है। देश के सबसे बड़े दुश्मन भारत में ही हैं।

वो जो बाल्टी में पेट्रोल भरकर ले जाते हैं और खुद वीडियो बनाकर अपलोड करते हैं।

वो जो 183 सिलेंडर या 524 सिलेंडर जमा करके कीमतें बढ़ाते हैं।

वो जो इन रैकेटों की जानकारी रखते हुए अपना हिस्सा लेकर चुप हो जाते हैं।

वो जो मीडिया में घबराहट फैलाकर व्यूज कमाते हैं।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि भारतीय नौसेना के जवान होर्मुज की खाड़ी में अपनी जान जोखिम में डालकर ईंधन के टैंकर सुरक्षित लेकर आ रहे हैं। और देश में कुछ लोग उस ईंधन को बाल्टियों में भरकर बर्बाद कर रहे हैं।

पेट्रोल संकट का सच यह भी है कि हमने स्कूल में शपथ ली थी कि भारत मेरा देश है और सभी भारतीय मेरे भाई-बहन हैं। लेकिन जब संकट आता है तो असली रंग सामने आता है।

पेट्रोल संकट का सच: आगे का रास्ता

पेट्रोल संकट का सच जानने के बाद रास्ता साफ है।

व्यक्तिगत स्तर पर ईंधन बचाएं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं। कारपूलिंग करें। इलेक्ट्रिक उपकरणों की तरफ बढ़ें।

जो लोग जमाखोरी और कालाबाजारी कर रहे हैं उनकी सूचना अधिकारियों को दें। चुप रहना भी इस समस्या का हिस्सा है।

सरकार से यह मांग करें कि रणनीतिक भंडार बढ़ाए, ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर काम करे, और बायोगैस जैसे समाधानों को मुख्यधारा में लाए।

पेट्रोल संकट का सच यह है कि अगर हम इस संकट से सीख लें और सही दिशा में काम करें तो यह संकट एक अवसर बन सकता है। लेकिन अगर हम घबराहट में और स्वार्थ में डूबे रहे तो यह संकट और गहरा होता जाएगा।

पेट्रोल संकट का सच हमें एक आईना दिखाता है। और उस आईने में जो चेहरा दिखे उसे सुधारने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

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