27 जून 1976 — यह तारीख इजराइल के इतिहास में सोने के अक्षरों में लिखी हुई है। इसी दिन एयर फ्रांस की फ्लाइट AF139 को हाईजैक किया गया था। यह हाईजैकिंग आम नहीं थी। यह हाईजैकिंग एक ऐसे मिलिट्री ऑपरेशन की शुरुआत थी जिसे आज भी दुनिया का सबसे बोल्ड और सबसे लंबी दूरी का रेस्क्यू ऑपरेशन माना जाता है। उस ऑपरेशन का नाम था — ऑपरेशन थंडरबोल्ट।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट की कहानी सिर्फ एक मिलिट्री मिशन की कहानी नहीं है। यह कहानी है साहस की, स्पीड की, इंटेलिजेंस की और उस जज्बे की जो कहता है — चाहे दुश्मन 4000 किलोमीटर दूर हो, हम अपने लोगों को वापस लाएंगे।
एयर फ्रांस फ्लाइट AF139 की हाईजैकिंग — ऑपरेशन थंडरबोल्ट की शुरुआत
27 जून 1976 को सुबह करीब 8:59 बजे इजराइल के बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट, तेल अवीव से एयर फ्रांस की फ्लाइट AF139 ने टेकऑफ किया। यह फ्लाइट पेरिस जाने वाली थी लेकिन बीच में ग्रीस के एथेंस में एक स्टॉप था। इस फ्लाइट में 246 से ज्यादा पैसेंजर थे, जिनमें ज्यादातर इजराइली और यहूदी यात्री थे।
एथेंस एयरपोर्ट पर यह फ्लाइट जब रुकी, तो चार आतंकवादी — जिनमें एक महिला भी थी — अपने हैंड बैग में बंदूकें और हैंड ग्रेनेड छुपाकर एयरपोर्ट की ढीली सिक्योरिटी को चकमा देकर इस फ्लाइट में सवार हो गए। उस समय एथेंस एयरपोर्ट पर एक मेटल डिटेक्टर बंद था और एक्स-रे स्क्रीनिंग पर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा था।
फ्लाइट AF139 एथेंस से टेकऑफ करने के मात्र 8 मिनट बाद — जब प्लेन गल्फ ऑफ कोरिंथ के ऊपर था — फर्स्ट क्लास में बैठे दो आतंकवादी एक हाथ में पिस्तौल और दूसरे हाथ में ग्रेनेड लेकर अचानक उठे और कॉकपिट की तरफ दौड़े। इकोनमी क्लास में बैठे बाकी दो आतंकवादियों ने भी पीछे के पैसेंजर को काबू में कर लिया। 2 से 3 मिनट के अंदर पूरी फ्लाइट AF139 आतंकवादियों के कब्जे में थी।
मुख्य आतंकवादी विलफ्रेड ने कॉकपिट में घुसकर कैप्टन माइकल बाकोज को पिस्तौल दिखाते हुए साफ आदेश दिया — “प्लेन को साउथ की तरफ, लीबिया की तरफ मोड़ो।” माइक्रोफोन पर एलान हुआ: “यह प्लेन हाईजैक हो चुका है। अब से इसे ‘हाईफा’ कहा जाएगा।”
यह एयर फ्रांस हाईजैकिंग 1976 की वह घटना थी जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया — और जिसने ऑपरेशन थंडरबोल्ट को जन्म दिया।
लीबिया से युगांडा — हाईजैकर्स का असली मकसद
फ्लाइट AF139 पहले लीबिया के बेनगाजी में उतरी। वहां 6-7 घंटे रुकने के बाद रिफ्यूलिंग हुई और फिर आतंकवादियों ने पायलट को युगांडा की तरफ मोड़ने का आदेश दिया। 29 जून 1976 को दोपहर 3:15 बजे फ्लाइट AF139 युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर उतरी।
एंटेबे एयरपोर्ट पर युगांडा की आर्मी चारों तरफ खड़ी थी — ट्रक, गाड़ियां, हथियारबंद सैनिक। यह साफ संकेत था कि युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन को पहले से पता था कि यह हाईजैक्ड फ्लाइट यहां आने वाली है।
एंटेबे एयरपोर्ट के ओल्ड टर्मिनल में सारे पैसेंजर को ले जाया गया। वहां तीन और PFLP आतंकवादी पहले से मौजूद थे — अब हाईजैकर्स की संख्या चार से बढ़कर सात हो गई थी।
इसके बाद हाईजैकर्स ने अपनी डिमांड की लिस्ट पेश की। उनकी मांग थी: दुनिया की विभिन्न जेलों में बंद उनके 53 साथियों को रिहा किया जाए — जिनमें से 40 इजराइल की जेल में थे — और 5 मिलियन डॉलर दिए जाएं। डेडलाइन: 1 जुलाई दोपहर 2 बजे तक।
हाईजैकर्स ने सभी पैसेंजर के पासपोर्ट चेक किए और उन्हें दो ग्रुप में बांट दिया — इजराइली और यहूदी पैसेंजर एक तरफ, बाकी सब दूसरी तरफ। यह नजारा उन पैसेंजर को द्वितीय विश्व युद्ध की याद दिला रहा था जब यहूदियों को अलग किया जाता था।
इजराइल की तैयारी — ऑपरेशन थंडरबोल्ट की नींव
जैसे ही इजराइल को खबर मिली कि फ्लाइट AF139 हाईजैक होकर युगांडा पहुंच गई है, इजराइल के वॉर रूम में हलचल मच गई। मोसाद, शिनबेट, IDF के प्लानर्स, एयरफोर्स स्ट्रेटेजिस्ट — सब जुट गए। बैक-टू-बैक मीटिंगें होने लगीं।
इजराइल ने सबसे पहले डिप्लोमेटिक रास्ता अपनाने की कोशिश की। अमेरिका के जरिए मिस्र के राष्ट्रपति और अफ्रीकी नेताओं से संपर्क किया गया। PLO के चेयरमैन यासिर अराफात को भी रीच आउट किया — लेकिन हाईजैकर्स ने अराफात से बात करने से भी मना कर दिया।
एक पुराने इजराइली अफसर बरूच बुर्का के जरिए ईदी अमीन से फोन पर बात कराई गई। बरूच ने ईदी अमीन को नोबेल पीस प्राइज का लालच भी दिया। लेकिन ईदी अमीन टस से मस नहीं हुआ।
इसी बीच इजराइल की इंटेलिजेंस टीम ने एक गेमचेंजर इनफॉर्मेशन हासिल की। जो नॉन-इजराइली पैसेंजर पेरिस छोड़े गए थे, उन्हें इजराइली टीम ने पेरिस पहुंचते ही इंटेरोगेट किया। हर एक डिटेल इकट्ठी की गई — हाईजैकर्स की संख्या, उनके हथियार, युगांडा आर्मी की पोजिशन, एंट्री और एग्जिट पॉइंट, कौन कहां सोता है।
एक और बड़ी इंटेलिजेंस मिली: एंटेबे एयरपोर्ट का ओल्ड टर्मिनल एक इजराइली कंस्ट्रक्शन कंपनी सोलेल बोने ने 1960-70 के बीच बनाया था। उस कंपनी के पास टर्मिनल का पूरा नक्शा था — हर कमरा, हर गलियारा, हर एंट्री-एग्जिट पॉइंट। इजराइल के पास अब ऑपरेशन थंडरबोल्ट को एग्जीक्यूट करने के लिए पूरी जानकारी थी।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट का फाइनल प्लान
1 जुलाई 1976 को इमरजेंसी मीटिंग में ब्रिगेडियर जनरल डैन ने तीन मिलिट्री प्लान पेश किए — लेक विक्टोरिया से नेवल कमांडो का रास्ता, पैराशूट से पैरा कमांडो ड्रॉप, और सिविल प्लेन में छुपकर जाना। लेकिन तीनों प्लान रिजेक्ट हो गए क्योंकि तीनों में एग्जिट स्ट्रेटजी ईदी अमीन के सहयोग पर निर्भर थी।
फिर एक नया फाइनल प्लान बना — ऑपरेशन थंडरबोल्ट। इस प्लान की खासियत थी स्पीड। बिजली की तेज रफ्तार की तरह ऑपरेशन एग्जीक्यूट करना था। इस प्लान में इजराइल किसी देश पर निर्भर नहीं था।
3 जुलाई 1976 की शाम 6:30 बजे इजराइल सरकार ने ऑपरेशन थंडरबोल्ट को अप्रूवल दिया। रात 11 बजे ऑपरेशन शुरू होना था — अगले दिन 4 जुलाई की दोपहर 2 बजे डेडलाइन थी।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट के लिए चार C-130 हरकुलिस प्लेन चुने गए। इन प्लेनों की खासियत थी — छोटे रनवे पर फास्ट लैंडिंग और टेकऑफ, भारी सामान उठाने की क्षमता और पिछला दरवाजा जो हवा में ही खुल जाता था। इन प्लेनों में Mercedes और Land Rover गाड़ियां भी लादी गईं जिनका किरदार बेहद अहम था।
इसके पीछे दो Boeing 707 भी चले — एक केन्या में बैकअप के लिए और दूसरा ऑपरेशन की फाइनल स्टेज में नजर रखने के लिए।
इजराइल से युगांडा की दूरी 4000 किलोमीटर से ज्यादा है। रास्ते में केन्या से सीक्रेट रिफ्यूलिंग का इंतजाम किया गया था।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट की रात — 3-4 जुलाई 1976
रात 11 बजे चारों C-130 प्लेन शर्म अल-शेख से उड़े। रेड सी पर इंटरनेशनल रूट पकड़ा, फिर इथियोपिया, केन्या और लेक विक्टोरिया के रास्ते रडार से नीचे, लाइटें बंद करके, एंटेबे की तरफ बढ़ते रहे।
जैसे ही पहला C-130 एंटेबे के पास पहुंचा, उसने अपनी लाइटें बंद कर लीं और दो इंजन ऑफ कर दिए ताकि आवाज कम हो। दरवाजे हवा में ही खुल गए। प्लान किए पॉइंट पर धीरे-धीरे लैंडिंग हुई। बैटरी लाइट से बाकी तीन प्लेनों को सिग्नल दिया गया।
अब ऑपरेशन थंडरबोल्ट का सबसे क्रिएटिव हिस्सा — फेक कॉन्वॉय।
ईदी अमीन जब एयरपोर्ट आता था तो एक काली Mercedes और Land Rover की काफिले में आता था। इजराइली कमांडो ने एग्जैक्ट वही गाड़ियां, वही नंबर प्लेट, वही झंडे तैयार किए थे। योनी नेतन याहू के नेतृत्व में 29 कमांडो और पैराट्रूपर इस फेक कॉन्वॉय में बैठ गए। 30 सेकंड से 2 मिनट में यह सब हो गया।
योनी नेतनयाहू — वह नाम जो इस ऑपरेशन का चेहरा बने। और उनके छोटे भाई थे बेंजामिन नेतनयाहू, जो आगे चलकर इजराइल के प्रधानमंत्री बने। यह बात अभी आगे आएगी।
फेक कॉन्वॉय 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से — एग्जैक्ट उसी स्पीड पर जैसे ईदी अमीन का काफिला चलता था — ओल्ड टर्मिनल की तरफ बढ़ा।
लेकिन तभी एक बड़ी दिक्कत आई।
जब प्लान में आई सबसे बड़ी रुकावट
ऑपरेशन थंडरबोल्ट लगभग खतरे में पड़ने वाला था। दो-तीन दिन पहले ईदी अमीन ने एक नई सफेद Mercedes खरीदी थी और तब से उसी में आ रहा था। यह इंटेल इजराइली कमांडो के पास नहीं था।
जब फेक कॉन्वॉय ओल्ड टर्मिनल से 300 मीटर की दूरी पर था, दो युगांडाई सिक्योरिटी गार्ड्स को शक हुआ — “ईदी अमीन तो अब सफेद Mercedes में आता है, यह काली Mercedes रात को क्यों आई?” उन्होंने कॉन्वॉय रोक लिया।
इजराइली कमांडो को सख्त हिदायत थी — युगांडाई आर्मी अफसरों को मारना नहीं है, नहीं तो वॉर जैसी स्थिति बन जाएगी। लेकिन रोके जाने पर काली Mercedes की पिछली खिड़की खुली और एक इजराइली कमांडो ने साइलेंसर वाली गन से एक गार्ड को मार दिया। दुर्भाग्य से पीछे वाली Land Rover से दूसरे गार्ड पर बिना साइलेंसर की फायरिंग हो गई।
पूरे रनवे पर तेज आवाज गूंजी। ऑपरेशन थंडरबोल्ट की स्पीड अब एकमात्र हथियार थी।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट का असॉल्ट — 53 मिनट में इतिहास
आवाज होते ही इजराइली कमांडो ने गाड़ियां छोड़ीं और कई ग्रुप में बंटकर ओल्ड टर्मिनल की तरफ तेजी से दौड़े। 300 मीटर की दूरी थी — वो तेजी से पहुंच गए।
ओल्ड ATC टावर से युगांडा आर्मी ने फायरिंग शुरू कर दी। दो टीमें उनसे निपटने लगीं। योनी नेतनयाहू की कोर टीम बिना रुके मेन हॉल की तरफ बढ़ती रही — क्योंकि ऑपरेशन थंडरबोल्ट की स्पीड ही इसकी जान थी।
तभी पीछे से युगांडा के एक अफसर ने गोली चलाई। गोली योनी नेतनयाहू को लगी। ऑपरेशन के शुरुआत में ही मुख्य लीडर शहीद हो गए। लेकिन कोई नहीं रुका।
टीम मेन हॉल में घुसी। एक हाईजैकर बाहर आया — मारा गया। अंदर दो हाईजैकर थे — उन्हें भी मार गिराया। मेगाफोन पर हिब्रू और अंग्रेजी में चिल्लाया गया: “Stay down! Stay down!” एक पैसेंजर गलती से खड़ा हो गया और मारा गया — ऑपरेशन थंडरबोल्ट का सबसे दुखद पल।
बाकी हाईजैकर कनेक्टिंग रूम में थे। पहले ग्रेनेड, फिर कमांडो अंदर घुसे। सातों के सातों हाईजैकर खत्म।
तीसरे प्लेन की टीम ने युगांडा एयरफोर्स के 11 MiG फाइटर जेट्स को लाइन से तबाह कर दिया — ताकि वापसी में युगांडा एयरफोर्स इजराइली प्लेनों का पीछा न कर सके।
टोटल 53 मिनट एयरपोर्ट पर रहे। 30 मिनट असॉल्ट चला। 7 हाईजैकर मारे गए। 102 होस्टेज आजाद हुए। तीन होस्टेज क्रॉस फायरिंग में मारे गए।
योनी नेतनयाहू — ऑपरेशन थंडरबोल्ट का असली हीरो
ऑपरेशन थंडरबोल्ट में अकेले इजराइली कमांडो जिनकी जान गई वह थे योनातन (योनी) नेतनयाहू। इनकी शहादत के बाद इजराइल में जबरदस्त राष्ट्रीय भावना उमड़ी। योनी नेतनयाहू राष्ट्रीय नायक बन गए।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट का नाम बदलकर ऑपरेशन यूनातन कर दिया गया — योनी के सम्मान में।
और इसी ऑपरेशन ने उनके छोटे भाई बेंजामिन नेतनयाहू को राजनीतिक पहचान दी। योनी की शहादत के बाद इजराइली जनता में नेतनयाहू परिवार के प्रति जो सहानुभूति और सम्मान पैदा हुआ, वह आगे चलकर बेंजामिन नेतनयाहू के प्रधानमंत्री बनने का बड़ा कारण बना।
ईदी अमीन का गुस्सा और डोरा ब्लोख की दुखद कहानी
ऑपरेशन थंडरबोल्ट के सफल होने के बाद ईदी अमीन आग-बबूला हो गया। उसने अपने आर्मी चीफ को भी गिरफ्तार करा दिया। केन्या पर बदला लेना चाहता था क्योंकि इजराइली प्लेनों ने वहां रिफ्यूलिंग की थी — लेकिन उसके सारे MiG जेट तबाह हो चुके थे।
एक होस्टेज जिसे बचाया नहीं जा सका — डोरा ब्लोख। वह बीमार होने की वजह से युगांडा के एक सिटी हॉस्पिटल में थीं। ब्रिटिश डीक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स में जिक्र है कि ईदी अमीन ने बदले में उन्हें किडनैप करवाकर मरवा दिया।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट — क्यों है यह इतिहास का सबसे बोल्ड मिशन
ऑपरेशन थंडरबोल्ट आज भी दुनिया का सबसे बोल्ड और सबसे लंबी दूरी का रेस्क्यू ऑपरेशन माना जाता है। इसकी खासियतें:
4000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी, दुश्मन देश में बिना इजाजत घुसना, रडार से नीचे उड़ना, बिजली की स्पीड में पूरे एयरपोर्ट को कंट्रोल करना, फेक कॉन्वॉय से आतंकवादियों को धोखा देना और सिर्फ 53 मिनट में 102 होस्टेज को छुड़ाकर वापस आना।
ऑपरेशन थंडरबोल्ट ने दुनिया को यह दिखाया कि सही इंटेलिजेंस, सही प्लानिंग और बेजोड़ स्पीड से असंभव काम भी संभव होता है। इसीलिए आज दुनिया भर की स्पेशल फोर्सेस ऑपरेशन थंडरबोल्ट को अपना इंस्पिरेशन मानती हैं।
एयर फ्रांस हाईजैकिंग 1976, युगांडा एंटेबे रेस्क्यू, और ऑपरेशन थंडरबोल्ट — यह तीनों मिलकर इतिहास की एक ऐसी कहानी बनाते हैं जो हर किसी को पढ़नी चाहिए।
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