खमेनई को मारने की पूरी कहानी: मोसाद और CIA की 8 साल की प्लानिंग
खमेनई एक ऐसा आदमी था जो पिछले 36 सालों से दुनिया के सबसे प्रोटेक्टेड इंसानों में से एक था। जिस बंकर में वो रहता था वो इतना गहरा था कि लिफ्ट को नीचे पहुंचने में पूरे 5 मिनट लगते थे। मल्टीपल लेयर सिक्योरिटी, हजारों गार्ड्स, अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क यानी एकदम इंपॉसिबल टारगेट। लेकिन हैक्ड कैमरा, सैटेलाइट इंटेलिजेंस और AI टेक्नोलॉजी का यूज करके मोसाद और CIA ने 28 फरवरी 2026 को मिसाइल एग्जैक्टली वहीं गिराई जहां खमेनई खड़े थे। यह कोई लक नहीं था। इसके पीछे दसियों साल की प्लानिंग लगी हुई थी। आज हम आपको स्टेप बाय स्टेप पूरी कहानी बताएंगे कि किस तरह मोसाद और CIA ने यह इंपॉसिबल मिशन पूरा किया।
2018 से पहले का डेडलॉक: न्यूक्लियर प्रोग्राम vs खमेनई की लीडरशिप
खमेनई के पावर में आने के बाद साल 2017 तक इजराइल और ईरान के बीच एक जंग चल रही थी। इजराइल का मकसद था ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना। इसके लिए इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइंटिस्टों को मारना शुरू किया। लेकिन खमेनई और उनकी लीडरशिप हर बार नए साइंटिस्ट अपॉइंट कर लेते थे। इजराइल अगर जाके न्यूक्लियर साइट उड़ा देता था तो खमेनई उस प्रोग्राम को दूसरी लोकेशन पर शिफ्ट कर लेते थे। यह एक डेडलॉक सिचुएशन थी। इजराइल जो कर रहा था उससे ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम स्लो तो हो रहा था लेकिन हमेशा के लिए खत्म नहीं हो पा रहा था। इस पर्टिकुलर टाइम तक इजराइल का एजेंडा सिर्फ यही था कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना है। खमेनई को मारना उनके एजेंडे में नहीं था।
31 जनवरी 2018: वो दिन जिसने सब बदल दिया
इसके एक साल बाद 31 जनवरी 2018 को एक ऐसी घटना हुई जो इजराइल की पूरी स्ट्रेटजी में बहुत बड़ा शिफ्ट लेके आ गई। तेहरान के सिरोबाद में एक वेयरहाउस के अंदर ईरान ने छुपाकर अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के सभी ओरिजिनल डॉक्युमेंट्स और डिस्क सीक्रेटली रखे हुए थे। उसी दिन मोसाद वहां पहुंची और ब्लो टॉर्च से लोहे के सेफ काटकर करीब आधा टन डॉक्युमेंट्स और डिस्क ट्रक में चुराकर इजराइल ले आई। इस डॉक्युमेंट हाईस्ट से इजराइल को एक बड़ा रियलिटी चेक मिला।
इन डॉक्युमेंट्स के अंदर इजराइल को बहुत सारी ऐसी चीजें पता चलीं जिनके बारे में उसे हवा तक नहीं थी। ईरान की ऐसी-ऐसी सीक्रेट अंडरग्राउंड लोकेशन के बारे में पता चला जो सैटेलाइट से भी नहीं दिखती थीं। मोसाद के इतने एजेंट ईरान के अंदर होने के बाद भी खमेनई और उनकी चुनिंदा लीडरशिप के आदेश पर बहुत ही सीक्रेटली यह सारी चीजें चलती रहती थीं। यहां से इजरायली वॉर कैबिनेट को रियलाइज हुआ कि बार-बार न्यूक्लियर साइट्स पर बॉम्ब गिराने से परमानेंट सॉल्यूशन नहीं मिलेगा। जब तक खमेनई और उनकी कोर टीम इंटैक्ट है, ये न्यूक्लियर प्रोग्राम रिबिल्ड करते रहेंगे। और यहीं से खमेनई को एलिमिनेट करने का फेज शुरू हुआ।
लेकिन खमेनई कोई आम आदमी नहीं था। खमेनई एक आदमी नहीं बल्कि पूरी कंट्री का एक सिंबल था। खमेनई को ऐसे ही मार देना एक बहुत बड़ा ट्रिगर बन जाता और चीजें फुल स्केल वॉर में कन्वर्ट हो जाती। इजराइल के सामने इंटरनेशनल लॉ का इश्यू, पॉलिटिकल बैकलैश यह सब आ जाता। बिना यूएस को साथ और दुनिया में पॉलिटिकल ग्राउंड तैयार किए बिना इजराइल खमेनई को मारने का रिस्क नहीं ले सकता था। इसलिए इजराइल ने स्ट्रैटेजिक डिले लिया और कहा कि सही टाइम और कंप्लीट इंटेलिजेंस प्रिपरेशन से ही यह काम होगा।
पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड: खमेनई का सबसे सुरक्षित किला
इजराइल ने दो चीजें साइमलटेनियसली शुरू कीं। पहली ग्राउंड प्रिपरेशन और दूसरी डिप्लोमेटिक प्रिपरेशन। इसके लिए सबसे पहले उस जगह को समझना जरूरी था जहां खमेनई रहते थे। तेहरान के अंदर पेस्टर स्ट्रीट रोड के बगल में 30 एकड़ का, 620 मीटर चौड़ा और 770 मीटर लंबा एक एरिया है। इसी एरिया को पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड या मोताहारी कॉम्प्लेक्स कहते हैं। इस कंपाउंड के अंदर खमेनई का घर और ऑफिस बैत ए रहबरी है। न्यूज में इसे हाउस ऑफ लीडरशिप भी कहते हैं। यहां पर खमेनई पब्लिक से मिलते थे। इसके साथ-साथ ईरानियन प्रेसिडेंट का ऑफिस, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, खमेनई के बेटे मुस्तबा का ऑफिस, सुप्रीम कोर्ट, मिनिस्ट्री ऑफ इंटेलिजेंस का हेडक्वार्टर और IRGC हेडक्वार्टर समेत 50 से ज्यादा टॉप ईरानी सरकारी ऑफिसेस इसी कंपाउंड में हैं।
इस पूरे कंपाउंड को थ्री लेयर में सिक्योर किया गया था। सबसे अंदर थर्ड लेयर खमेनई के घर और ऑफिस के 500 मीटर के रेडियस पर एक्टिव रहती थी। वली ए अम्र के गार्ड जो डायरेक्टली खमेनई को रिपोर्ट करते थे, यह लेयर संभालते थे। दूसरी लेयर 350 मीटर के रेडियस तक एक्टिव थी। पहली लेयर कंपाउंड की इंडिविजुअल बिल्डिंग्स को सिक्योर करती थी। अंसार, अल महदी, रैपिड रिएक्शन यूनिट जैसी ईरान की सबसे कैपेबल सिक्योरिटी फोर्सेस यहां तैनात थीं। रोटेटिंग कैमरास, फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन डिवाइसेस, मोबाइल फोन जैमर्स, रॉकेट और ड्रोन रोकने के लिए लोहे के जाल सब कुछ था।
लेकिन पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड दो पार्ट में था। एक जमीन के ऊपर और एक जमीन के नीचे। नीचे एक बहुत गहरा बंकर था और यह इतना गहरा था कि इस बंकर में नीचे पहुंचने के लिए 5 मिनट लगते थे। खमेनई ज्यादातर समय इसी बंकर में रहते थे। यह बंकर पूरे तेहरान के नीचे 5 किलोमीटर के एरिया में टनल नेटवर्क से फैला हुआ था। आठ से ज्यादा एंट्री और एग्जिट गेट थे जहां से खमेनई नीचे-नीचे ही कहीं भी निकल सकते थे। ये एंट्री एग्जिट गेट जानबूझकर मस्जिद, स्कूल और हॉस्पिटल के नीचे रखे गए थे ताकि हमले से बचा जा सके।
इजराइल की मल्टी-लेयर्ड इनफिल्ट्रेशन स्ट्रेटजी
इजरायली इंटेलिजेंस ने पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड को इनफिल्ट्रेट करने के लिए मल्टी-लेयर्ड इनफिल्ट्रेशन स्ट्रेटजी बनाई। सबसे पहले ह्यूमन इनफिल्ट्रेशन। कंपाउंड के अंदर के मेंटेनेंस स्टाफ जैसे इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, क्लीनर्स में से कुछ को इजराइल ने एजेंट बनाया, कुछ को रिक्रूट किया। कुछ लोकल्स जो खमेनई की लीडरशिप के खिलाफ थे उन्हें इजराइल ने हायर किया। ये लोग डायरेक्टली कंपाउंड में नहीं जाते थे लेकिन आसपास रहकर फूड डिलीवरीज, कंपाउंड का कचरा और मूवमेंट रिपोर्ट करते थे। कंपाउंड से निकलने वाले कचरे को भी एनालाइज किया जाता था।
इसके साथ हैवी टेक्निकल सर्विलांस शुरू किया गया। खमेनई के गार्ड, ड्राइवर्स, कुक, डॉक्टर्स के फोन इजरायली कंपनी NSO ग्रुप के स्पाईवेयर पेगासस से हैक किए गए। रूट मैपिंग की गई। बंकर के हर एंट्रेंस, एग्जिट गेट और मूवमेंट को मैप किया गया। इजरायली इंटेलिजेंस ने ईरान में हजारों ड्रोन स्मगल करके अलग-अलग एरिया में छुपाने शुरू किए।
गेम चेंजर: हैक्ड चाइनीज कैमरे
इसी दौरान एक बहुत बड़ी गेम चेंजर इंटेल हाथ लगी। ईरान ने पूरे तेहरान और इस कंपाउंड में चाइनीज कंपनी के Hikvision कैमरे लगवाए थे। इन कैमरों से प्रोटेस्टर्स पर नजर रखी जाती थी। लेकिन इन कैमरों में एक रिमोट कोड एग्जीक्यूशन बग था। अगर फर्मवेयर अपग्रेड न किया जाए तो कोई भी हैकर रिमोटली इसे हैक कर सकता था। इजराइल की यूनिट 8200 ने इस बग का फायदा उठाया और ईरान की गलियों, चौराहों, ऑफिसेस, ट्रैफिक कैमरे सहित पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड के कैमरे हैक कर लिए। और यहां से सारी रिकॉर्डिंग इजराइल में पहुंचने लगी।
इसके बाद पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड को आसमान से भी घेरा गया। इजराइल की सैटेलाइट Ofek 13 और 16 रेगुलरली पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड के ऊपर से निकलती थी और छोटी से छोटी मूवमेंट ट्रैक करके इजराइल के पास भेजती थी। यूएस की KH-11 सीरीज सैटेलाइट इतनी प्रिसाइज थी कि 500-600 किलोमीटर ऊपर से ही गाड़ी की नंबर प्लेट और रूफटॉप पर कौन सा एंटेना लगा है यह पता कर लेती थी। और सबसे बड़ी गेम चेंजर थी Orion सैटेलाइट। जब भी कंपाउंड के अंदर का कोई कमांडर वॉकी-टॉकी पर बात करता या सैटेलाइट फोन कॉल करता, Orion सैटेलाइट इन सारे सिग्नल्स को पकड़ लेती थी और ऑस्ट्रेलिया के Pine Gap में सारा डाटा प्रोसेस होता था।
एक एक्स-CIA ऑफिशियल ने The Guardian को बताया था कि इस कंपाउंड में खाने में क्या मंगाया जाता है, यह इंफॉर्मेशन तक इजराइल को लाइव पहुंचती थी।
ईरान का काउंटर: फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क और सैटेलाइट विंडो
ईरान की इंटेलिजेंस भी पूरी तरह एक्टिव थी। साल 2023 आते-आते खमेनई के आसपास किसी को भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या सिग्नल ट्रांसमिट करने वाली चीज रखना अलाउड नहीं था। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लहरीजानी को जब बंकर के अंदर खमेनई से मिलने बुलाया जाता था तो आंख में पट्टी बांधकर लाया जाता था। खमेनई की सिक्योरिटी टीम ने यूएस और इजराइल की सैटेलाइट की हर डिटेल कैलकुलेट कर रखी थी कि वे कितनी हाइट पर हैं, कितनी स्पीड से मूव करती हैं, ऑर्बिट कब कंप्लीट करती हैं। इसी के हिसाब से सैटेलाइट की टाइम विंडो निकालकर उसी दौरान खमेनई के कॉन्वॉय की मूवमेंट की जाती थी।
पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड को फाइबर ऑप्टिक केबल नेटवर्क से जोड़ दिया गया था। इन केबल्स में डाटा लाइट पल्सेस से ट्रैवल करता है जिसे Orion सैटेलाइट पकड़ नहीं पाती थी।
7 अक्टूबर 2023: हमास अटैक और मिशन का एक्सेलरेशन
सितंबर 2023 में यह सर्विलांस-काउंटर सर्विलांस गेम चल रहा था। लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल पर हमला कर दिया और यह इजराइल के लिए एक बड़ा ट्रिगर पॉइंट बन गया। दुनिया की सिंपैथी इजराइल के साथ आ गई। इजराइल ने सारा ब्लेम ईरान और उसकी प्रॉक्सी हिजबुल्ला और हमास पर डाला। इसी टाइम पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड में मोसाद के एजेंट्स का डिप्लॉयमेंट डबल हो गया। और खमेनई को मारने का जो प्लान था वो अब एग्जीक्यूशन मोड में शिफ्ट हो गया।
AI और Maven Smart System: लाखों GB डाटा का एनालिसिस
इतने सालों में इकट्ठा हुए लाखों GB डाटा जैसे हजारों कैमरों की वीडियो रिकॉर्डिंग, लाखों टैप्ड फोन कॉल्स, मोबाइल डाटा, सैटेलाइट इमेजेस और हजारों पेज की एजेंट रिपोर्ट को प्रोसेस करना एक इंसान के बस की बात नहीं थी। इसके लिए प्राइवेट कंपनी Palantir के Maven Smart System का यूज किया गया जिसमें क्लाउड AI इंटीग्रेट था। सारा डाटा इस Maven Smart System में डाला गया और सॉफ्टवेयर ने 90 मिनट में 98.7% एक्यूरेसी के साथ खमेनई को मारने के लिए हजारों पोटेंशियल टारगेट की लिस्ट बना दी।
इस AI ने ऐसे डाटा पॉइंट प्रिडिक्ट किए जैसे कौन सा ड्राइवर किस लीडर की कार चलाता है, कौन सा गार्ड किस लीडर की सिक्योरिटी में है, शिफ्ट कब चेंज होती है, खतरे के समय खमेनई कौन से बंकर में जाते हैं, यहां तक कि खमेनई का बॉडी पोश्चर और चलने का स्टाइल भी एनालाइज किया गया ताकि खमेनई और उनके बॉडी डबल में डिफरेंस समझा जा सके।
बाइडन की रुकावट और ट्रंप का आगमन
इजराइल के सामने एक बड़ी दिक्कत थी। यूएस में बाइडन प्रेसिडेंट थे और बाइडन ईरान पर डायरेक्ट हमले का सपोर्ट खुलकर नहीं कर रहे थे। अप्रैल 2024 में Reuters ने रिपोर्ट पब्लिश की जिसमें बताया गया कि बाइडन ने इजराइल को वॉर्न भी कर दिया था कि यूएस किसी भी रिटैलिएटरी एक्शन में पार्ट नहीं लेगा। लेकिन नवंबर 2024 में यूएस प्रेसिडेंशियल इलेक्शन होने वाले थे। इजराइल ने स्ट्रैटेजिक पॉज लिया और इंतजार किया।
5 नवंबर 2024 को ट्रंप इलेक्शन जीत गए। इस इलेक्शन में प्रो-इजराइल डोनर मिरियम एडेलसन ट्रंप की सबसे बड़ी इंडिविजुअल डोनर में से एक बनीं। जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स ने प्रिडिक्ट किया कि ट्रंप ईरान के खिलाफ हार्ड एक्शन लेंगे। और हुआ भी ऐसा ही।
ऑपरेशन राइजिंग लाइन: 13 जून 2025
ट्रंप के पावर में आने के कुछ महीने बाद 13 जून 2025 को इजराइल ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन राइजिंग लाइन शुरू कर दिया। यूएस ने फुल सपोर्ट किया और अपने जेट्स भी भेजे। ईरान की अलग-अलग साइट्स पर जॉइंट एयर स्ट्राइक की गई। इसी दौरान खमेनई अपने पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड से तेहरान के नॉर्थ ईस्ट में अपने लाविजान वाले अंडरग्राउंड बंकर में शिफ्ट हो गए। यह बंकर भी नॉर्मल नहीं था। GBU-57 जैसे हैवी बंकर बस्टर का इंपैक्ट भी झेल सकता था।
17 जून 2025 को ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट किया: “हमें पता है खमेनई कहां हैं, लेकिन फिलहाल हम उन्हें नहीं मारेंगे।” इसके कुछ दिन बाद एयर स्ट्राइक रुक गई और नेगोशिएशन शुरू हुई। लेकिन समस्या यह थी कि इतनी हैवी स्ट्राइक के बाद भी ईरान की कई क्रिटिकल न्यूक्लियर साइट्स को या तो मिनिमल डैमेज हुआ या वे बच गईं। ऊपर से ईरान ने पहले से 60% एनरिचमेंट कर लिया था। इजराइल का डर और बढ़ गया।
फाइनल डेट फिक्स: नवंबर 2025 की मीटिंग
नवंबर 2025 को PM नेतन्याहू ने डिफेंस मिनिस्टर, मोसाद चीफ और IDF इंटेलिजेंस हेड के साथ मीटिंग करके खमेनई को मारने का फाइनल प्लान और डेट फिक्स कर दी। डिसाइड किया गया कि 2026 के फर्स्ट क्वार्टर में खमेनई को एलिमिनेट कर दिया जाएगा। यह बात बाद में इजराइल के डिफेंस मिनिस्टर इजराइल कार्स ने असेसिनेशन के बाद खुद रिवील की।
लेकिन एक्चुअल एयर स्ट्राइक के लिए लाइव और रियल-टाइम इंटेलिजेंस जरूरी थी। मिनट बाय मिनट पता होना चाहिए था कि स्ट्राइक के टाइम पर खमेनई एग्जैक्टली कहां हैं, किस डायरेक्शन में मूव कर रहे हैं। इसके लिए AI का यूज करके खमेनई का पैटर्न ऑफ लाइफ निकाला गया। हर इंसान एक प्रिडिक्टेबल पैटर्न फॉलो करता है। खमेनई का ड्राइवर मॉर्निंग में 6:45 पर निकलता है, सिक्योरिटी चीफ मंगलवार को भाई से मिलते हैं। इन सब ऑब्जर्वेशन से AI ने खमेनई का पूरा पैटर्न निकाला। और ग्राउंड पर भी खमेनई के इनर सर्कल में इजराइल के एजेंट अंदर तक घुसे थे।
23 फरवरी 2026: गोल्डन ऑपरचुनिटी
23 फरवरी 2026 को इजराइल को वह इंटेल मिली जिसके लिए वो सालों से इंतजार कर रहे थे। कंफर्म इंफॉर्मेशन मिली कि 28 फरवरी 2026 को खमेनई अपने 40 टॉप ऑफिसर्स के साथ पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड के बैत ए रहबरी में हाई लेवल मीटिंग करने वाले हैं। यह गोल्डन ऑपरचुनिटी थी क्योंकि सिर्फ खमेनई नहीं, पूरी लीडरशिप एक साथ एक जगह एक टाइम पर इकट्ठा होने वाली थी।
फिर 27 फरवरी 2026 को दो और बड़े इंटेल मिले। पहला यह कि मीटिंग बंकर में नहीं बल्कि कंपाउंड के ऊपर वाले एरिया में होगी। दूसरा यह कि रात के टाइम को चेंज करके मॉर्निंग का टाइम कर दिया गया। 27 फरवरी को 3:38 PM EST पर इजराइल ने ये सारी डिटेल्स यूएस के साथ शेयर कीं और ट्रंप ने खमेनई को एलिमिनेट करने का अप्रूवल दे दिया।
28 फरवरी 2026: मॉडर्न हिस्ट्री की सबसे बड़ी जॉइंट एयर स्ट्राइक
28 फरवरी 2026 की सुबह 7:30 बजे इजराइल के Nevatim एयरबेस और बाकी बेसेस से F-35 और F-15 फाइटर जेट्स पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड की तरफ रवाना हुए। साथ ही मिडिल ईस्ट के रीजनल बेसेस से यूएस के जेट्स भी निकले। इधर खमेनई बंकर से निकलकर ऊपर आए और IRGC चीफ मोहम्मद पाकपुर, डिफेंस मिनिस्टर अजीज ईरानी और 40 टॉप ऑफिशियल्स के साथ मीटिंग शुरू कर दी। पार्किंग के हैक्ड कैमरों से सारी इंफॉर्मेशन बैक-टू-बैक इजराइल कंफर्म करती जा रही थी।
7:50 पर इजराइल और यूएस के जेट्स ईरान के एयर स्पेस में घुसने वाले थे। उसी टाइम पेस्टर स्ट्रीट कंपाउंड के मोबाइल टावर जैम हो गए। गार्ड्स के नंबर डायल करने पर नेटवर्क बिजी आने लगा। कंपाउंड का सारा इंफॉर्मेशन फ्लो बंद हो गया।
अब सबसे बड़ा चैलेंज था ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम जो रशियन-मेड S-300 और Bavar-373 से पूरे तेहरान को शील्ड करता था। यहां पर इजराइल की सालों की प्लानिंग काम आई। Unit 8200 की साइबर वॉरफेयर टीम ने ईरान के एयर डिफेंस नेटवर्क में सप्लाई चेन के थ्रू एंबेडेड मालवेयर डाले थे जो सालों से इनएक्टिव पड़े थे। ठीक उसी वक्त इन मालवेयर को एक्टिवेट किया गया। ईरान की सारी रेडार स्क्रीन ब्लैंक हो गईं, टारगेटिंग कंप्यूटर ग्लिच करने लगे, कमांड सेंटर का फील्ड यूनिट से कनेक्शन बंद हो गया। पूरा एयर डिफेंस नेटवर्क पैरालाइज हो गया।
बैकअप के तौर पर यूएस नेवी के EA-18G Growler एयरक्राफ्ट पर्शियन गल्फ में डिप्लॉय थे। इनके पावरफुल जैमिंग सिस्टम ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स ब्रॉडकास्ट करके जो भी रेडार बचे थे उन्हें भी डिस्टर्ब कर दिया। और जो ड्रोन सालों पहले ईरान में स्मगल करके रखे थे, वो एक्टिवेट होकर S-300 और Bavar-373 बैटरियों को जा-जाकर उड़ा आए।
एग्जैक्टली 9:40 बजे: पिनपॉइंट स्ट्राइक
9:40 बजे यूएस और इजराइल के फाइटर जेट्स ने पहला बम गिराया। इंटेल इतनी एक्यूरेट थी कि एग्जैक्टली जहां मीटिंग चल रही थी वहीं पर 30 से ज्यादा Blue Sparrow मिसाइल गिराई गईं। यह मिसाइल पहले 90 डिग्री एंगल से एटमॉस्फेयर से बाहर जाती हैं फिर हाइपरसोनिक स्पीड से टारगेट हिट करती हैं। एग्जैक्टली वहीं 30 मिसाइल गिरीं जहां खमेनई मीटिंग कर रहे थे। हर एक चीज तबाह हो गई। सारे लोग मारे गए।
इस हमले के बाद इजराइल और यूएस के जेट्स ने ईरान के ड्रोन बेसेस, एयरक्राफ्ट शेल्टर्स और रेडार साइट्स पर कोऑर्डिनेटेड हमले किए।
हमले के बाद: सरेंडर नोटिफिकेशन और गिरफ्तारी
हमले के 12 मिनट बाद ईरानी लोगों के मोबाइल पर एक रिलीजियस ऐप “सबा” के थ्रू नोटिफिकेशन आने लगे: “Help Has Arrived” और फिर ईरानी आर्मी को सरेंडर करने को कहा गया। इस ऐप ने लोकेशन और दूसरे डाटा का एक्सेस मांगा था। इससे समझा जा सकता है कि किस हद तक ईरानी लोगों का डाटा कॉम्प्रोमाइज था।
इस हमले में खमेनई के साथ उनकी बेटी, दामाद, बेटी के बच्चे और ऑलमोस्ट सभी ऑफिशियल मारे गए। बस खमेनई के बेटे मुस्तबा जो अभी सुप्रीम लीडर बने हैं वो बच गए क्योंकि थोड़ी देर पहले ही वो मीटिंग से निकलकर पास की बिल्डिंग में चले गए थे, हालांकि वो इंजर्ड हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी पिनपॉइंट स्ट्राइक के पीछे खमेनई का कोई बहुत ही करीबी था जो इजराइल के साथ मिला हुआ था। ईरानी कुड्स फोर्स जनरल इस्माइल खानी पर भी सवाल उठे क्योंकि इससे पहले भी नौ बार ऐसे हमलों में वे अकेले बच निकले थे, हालांकि मोसाद ने ट्विटर पर सफाई दी। बाद में ईरानी एजेंसियों ने इस्माइल खानी को अरेस्ट कर लिया।
खमेनई का फ्यूनरल भी बार-बार चेंज करना पड़ा। मजबूरी में बॉडी को डीप फ्रीज में रखा गया क्योंकि ट्रंप का भरोसा नहीं था। कहीं फ्यूनरल की गैदरिंग पर ही बम न गिरवा दें।
यह पूरा मिशन इस बात का सबूत है कि मॉडर्न वॉरफेयर में इंटेलिजेंस, AI टेक्नोलॉजी, साइबर वॉरफेयर और दीर्घकालिक प्लानिंग मिलकर कैसे किसी भी “इंपॉसिबल टारगेट” को पॉसिबल बना सकते हैं। खमेनई दुनिया के सबसे प्रोटेक्टेड लोगों में से एक थे, लेकिन 8 साल की प्लानिंग और मोसाद-CIA की जॉइंट इंटेलिजेंस ने साबित किया कि कोई भी टारगेट अंततः अनटचेबल नहीं होता।
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