यूरोपा मिशन: NASA को जुपिटर के इस चंद्रमा पर मिल सकती है एलियन लाइफ

यूरोपा मिशन: NASA को जुपिटर के इस चंद्रमा पर मिल सकती है एलियन लाइफ

यूरोपा मिशन: NASA को जुपिटर के इस चंद्रमा पर मिल सकती है एलियन लाइफ

यूरोपा मिशन अब तक के सबसे रोमांचक और महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों में से एक है। यूरोपा मिशन का उद्देश्य है जुपिटर के चौथे सबसे बड़े चंद्रमा यूरोपा पर एलियन जीवन की खोज करना। यूरोपा मिशन इसलिए इतना खास है क्योंकि NASA के डेटा के अनुसार यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे हमारी पृथ्वी के महासागरों जैसा ही एक नमकीन पानी का विशाल समुद्र छुपा हुआ है।

यूरोपा मिशन की कहानी 1979 से शुरू होती है जब वॉयेजर मिशन ने यूरोपा की क्लोज-अप तस्वीरें लीं। फिर 1989 में लॉन्च हुए गैलीलियो मिशन ने स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा से यह साबित किया कि यूरोपा की सतह पूरी तरह ठोस बर्फ से ढकी है लेकिन जुपिटर की शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण उसकी सतह लगातार खिंचती और दबती रहती है। इसे टाइडल फ्लेक्सिंग कहते हैं। इस लगातार खिंचाव-दबाव के कारण यूरोपा का केंद्र सक्रिय रहता है और उसमें भारी मात्रा में भूतापीय ऊर्जा उत्पन्न होती है जिससे सतह के नीचे का पानी तरल अवस्था में बना रहता है।

यूरोपा मिशन के वैज्ञानिकों ने यह भी गणना की है कि यूरोपा के समुद्र में पृथ्वी से दोगुना पानी मौजूद है।

यूरोपा मिशन और जीवन के तीन बुनियादी मापदंड

यूरोपा मिशन को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि NASA के वैज्ञानिकों के अनुसार जीवन के जन्म के लिए तीन बुनियादी शर्तें होती हैं।

पहली शर्त है पानी। दूसरी शर्त है ऊर्जा। और तीसरी शर्त है रसायन विज्ञान यानी केमिस्ट्री।

यूरोपा मिशन में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी इसलिए है क्योंकि हम चाहे कितने भी विकसित और बुद्धिमान क्यों न बन जाएं, अंत में हम सब निर्जीव परमाणुओं से ही बने हैं। कुछ विशेष तत्व जैसे कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर आदि जब एक विशेष तरीके से आपस में मिलते हैं तो उनकी केमिस्ट्री से जीवन का जन्म होता है।

यूरोपा मिशन के संदर्भ में इसे समझने के लिए चाय का उदाहरण लीजिए। चाय पत्ती, चीनी और अदरक को एक बर्तन में रखने से क्या चाय बन जाएगी? बिल्कुल नहीं। चाय बनने के लिए एक माध्यम चाहिए जो है पानी और फिर चाहिए ऊर्जा। ठीक इसी तरह पृथ्वी के शुरुआती दिनों में इन तत्वों को आपस में मिलने के लिए पानी और ऊर्जा की जरूरत थी जो उस समय हमारे महासागरों में मौजूद थी।

हेडल जोन — यूरोपा मिशन की प्रेरणा

यूरोपा मिशन की असली प्रेरणा पृथ्वी के गहरे समुद्र से मिली है। एक आम गलतफहमी है कि हम सजीव प्राणी सूर्य के बिना जी नहीं सकते। लेकिन सच यह है कि हम ऊर्जा के बिना नहीं जी सकते और सूर्य का प्रकाश तो केवल ऊर्जा के कई स्रोतों में से एक है।

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत सूर्य के प्रकाश से नहीं हुई थी। इसीलिए यूरोपा मिशन के लिए NASA की दिलचस्पी महासागर के सबसे निचले हिस्से में है जिसे हेडल जोन कहते हैं।

हेडल जोन महासागर का सबसे नीचे का हिस्सा होता है जो समुद्री तल को छूता है। कई जगहों पर यह 11 किलोमीटर की गहराई तक जाता है और यह खतरनाक भूभाग से भरा हुआ है। यहाँ पाए जाते हैं हाइड्रोथर्मल वेंट्स यानी पानी के नीचे के ज्वालामुखी।

हाइड्रोथर्मल वेंट्स जब फटते हैं तो उबलता हुआ पानी और साथ में खनिज और लावा की भाप निकलती है। इन वेंट्स से निकलने वाले पानी का तापमान लगभग 400 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है जो ठोस धातु को भी पिघला सकता है।

यूरोपा मिशन के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सूर्य से नहीं बल्कि हमारी पृथ्वी के अत्यंत गर्म केंद्र से निकली ऊर्जा ने पृथ्वी पर जीवन को जन्म दिया। इसी ऊर्जा के कारण सबसे पहले जटिल जैव अणु जैसे प्रोटीन, लिपिड्स, RNA आदि बने। जिसने फिर पहले एककोशिकीय जीवाणुओं और वायरसों को जन्म दिया जो लाखों-करोड़ों सालों के उत्परिवर्तन और विकास के बाद बहुकोशिकीय पौधों और जीव प्रजातियों में बदल गए।

यूरोपा मिशन और यूरोपा की समानता पृथ्वी से

यूरोपा मिशन इसीलिए इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि जैसे पृथ्वी का केंद्र भूतापीय ऊर्जा से भरा है, उसी तरह यूरोपा का केंद्र भी भूतापीय ऊर्जा से भरा हुआ है। और इन दोनों के महासागरों की रासायनिक संरचना भी बहुत मिलती-जुलती है। इसीलिए यूरोपा मिशन के वैज्ञानिक मानते हैं कि यूरोपा पर भी हाइड्रोथर्मल वेंट्स मिलने की बहुत ज्यादा संभावना है।

यूरोपा मिशन के लिए एक अन्य अध्ययन में यह भी साबित हुआ कि यूरोपा के वातावरण और सतह की संरचना में वो बुनियादी तत्व भी मौजूद हैं जो जीवन की जैव रसायन को समर्थन दे सकें। जैसे कार्बन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, सल्फर आदि।

तीनों शर्तें — पानी, ऊर्जा और सही रसायन — यूरोपा पर मौजूद हैं। यही वजह है कि यूरोपा मिशन को इतना महत्व दिया जा रहा है।

यूरोपा मिशन की विशालता — चंद्रयान 3 से 1600 गुना बड़ी चुनौती

यूरोपा मिशन को समझने के लिए इसे हमारे चंद्रयान 3 मिशन से तुलना करके देखते हैं जो एक सफल और बहुत सराहा गया मिशन था। चंद्रयान 3 में चंद्रमा तक पहुँचने के लिए हमारे रॉकेट ने पृथ्वी के पाँच चक्कर लगाए थे ताकि एक स्लिंग शॉट इफेक्ट से वहाँ तक जाने की गति मिल सके।

लेकिन यूरोपा मिशन में NASA ने एक पिनबॉल गेम जैसी रणनीति अपनाई है। जुपिटर के चंद्रमा यूरोपा की दूरी चंद्रयान 3 के लूनर मिशन से लगभग 1600 गुना ज्यादा है।

यूरोपा मिशन की यात्रा के पैमाने को ऐसे समझिए — अगर चंद्रमा आपकी बगल वाली इमारत में है तो यूरोपा की दूरी मुंबई से दिल्ली तक की यात्रा के बराबर होगी।

और इस यात्रा में बड़े-बड़े गैस दिग्गज ग्रहों की तगड़ी गुरुत्वाकर्षण शक्ति, उनके सैकड़ों चंद्रमाओं का गुरुत्वाकर्षण हस्तक्षेप, क्षुद्रग्रह बेल्ट जिसमें लाखों अंतरिक्ष वस्तुएं हैं उनसे बचते हुए जाना और सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति तथा सौर हवाओं से गुजरना — यह यूरोपा मिशन को अत्यंत जटिल बनाता है।

यूरोपा क्लिपर — यूरोपा मिशन का पहला चरण

यूरोपा मिशन का पहला चरण है यूरोपा क्लिपर सैटेलाइट। यूरोपा मिशन की अपेक्षित समय-सीमा इस प्रकार है।

यूरोपा क्लिपर अक्टूबर 2024 में पृथ्वी से लॉन्च होगा। फिर यह मंगल तक पहुँचकर उसका स्लिंग शॉट लेगा और बूमरैंग की तरह पृथ्वी की तरफ वापस आएगा। फिर पृथ्वी का स्लिंग शॉट लेकर जुपिटर की दिशा में गति पकड़ेगा। यूरोपा मिशन के लिए पृथ्वी से निकलकर यूरोपा तक पहुँचने में वैज्ञानिकों ने लगभग 7 साल की यात्रा की गणना की है।

यूरोपा मिशन में इस पूरे समय के दौरान हर एक ग्रह और अंतरिक्ष पिंड की वर्तमान स्थिति और भविष्य की स्थिति की गणना करनी होगी। यह जानना होगा कि ठीक किस कोण से यानसाफ्ट को लॉन्च करना है क्योंकि ग्रह और चंद्रमा तो अपनी-अपनी कक्षा में घूम रहे हैं। यूरोपा मिशन में हर पड़ाव पर किस दिशा में और कितने समय में पहुँचना है — यह सब NASA ने गणना और पूर्वानुमान करके प्रोग्राम किया है।

यूरोपा मिशन में जुपिटर के नजदीक पहुँचने के बाद यूरोपा की कक्षा में प्रवेश करने के लिए यूरोपा क्लिपर सैटेलाइट जुपिटर के गैलीलियन चंद्रमाओं यानी जुपिटर के चार सबसे बड़े चंद्रमाओं के कई फ्लाईबाय करके यूरोपा की कक्षा में घुसेगा।

2031 में यूरोपा मिशन की असली शुरुआत

जब 2031 में यूरोपा मिशन की अंतरिक्ष यात्रा खत्म होगी तो प्रोब यूरोपा पर उसकी सतह और वातावरण का अध्ययन करना शुरू करेगा। यूरोपा मिशन के तहत यह प्रोब वहाँ के गुरुत्वाकर्षण मान, तापमान रीडिंग, वातावरण, हवाएं आदि का डेटा पृथ्वी तक भेजेगा।

यूरोपा मिशन का सबसे रोमांचक हिस्सा इसके बाद शुरू होगा। यूरोपा पर पहुँचने के कुछ ही दिनों बाद यूरोपा की सतह पर क्रायोबॉट्स यानी बर्फ भेदने वाले रोबोट भेजे जाएंगे जो उसकी सतह की विस्तृत जाँच करेंगे।

वर्तमान अनुमान के अनुसार यूरोपा पर कम से कम 2 किलोमीटर से लेकर 20 किलोमीटर तक मोटी बर्फ की परत हो सकती है। यूरोपा मिशन में इस बर्फ को भेदकर प्रोब को नीचे गहरे पानी तक पहुँचना होगा जिसमें सालों का वक्त लग सकता है।

यूरोपा मिशन का वो क्रायोबॉट परमाणु ऊर्जा से बर्फ को पिघलाते-पिघलाते नीचे समुद्र की गहराई तक पहुँचेगा और अपने साथ 48 माइक्रो रोबोट ले जाएगा जिन्हें नीचे तैनात किया जाएगा। वो माइक्रो रोबोट फिर समुद्र की गहराई में अलग-अलग जगह तैरकर जीवन की खोज करेंगे।

एलियन लाइफ मिली तो कैसी होगी?

यूरोपा मिशन की सबसे रोमांचक बात यह है कि अगर वहाँ एलियन जीवन मिल जाता है तो उसकी जीव विज्ञान आखिर कैसी होगी? यूरोपा मिशन से यह भी पता चल सकता है कि हम इस ब्रह्मांड में अकेले नहीं हैं।

लेकिन यूरोपा मिशन के वैज्ञानिकों को एक बड़ी बात का ध्यान रखना होगा। हम जीवन के जन्म को उसी तरह से अध्ययन करने की कोशिश कर रहे हैं जिस तरह से जीवन पृथ्वी पर विकसित हुआ था। लेकिन DNA जैसा कोई दूसरा स्व-प्रतिकृति करने वाला जटिल अणु जरूरी नहीं कि सिर्फ पृथ्वी वाले तरीके से ही जन्म लेता हो या पानी आधारित ही हो।

यूरोपा मिशन के नजरिए से देखें तो जीवन के जन्म के और भी कई तरीके हो सकते हैं जो अब तक हमें पता नहीं हैं। हम सिर्फ पृथ्वी वाले मॉडल के आधार पर ही खोज कर रहे हैं जो बेहद दुर्लभ हो सकता है। यूरोपा मिशन से जो भी जानकारी मिलेगी वो हमारी इस समझ को और गहरा करेगी।

यूरोपा मिशन — इंसानियत की जिज्ञासा की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति

यूरोपा मिशन केवल एक वैज्ञानिक अभियान नहीं है। यह इंसानी जिज्ञासा की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति है। दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियाँ मिलकर एलियन जीवन को सदियों से ढूंढने की कोशिश कर रही हैं।

यूरोपा तो हमारे अंतरिक्ष के नजरिए से काफी करीब है। आज हमारे पास केपलर स्पेस टेलिस्कोप, हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप जैसे उपकरण हैं जिनसे हम जीवन के प्रमाण लाखों प्रकाश वर्ष दूर तक खोज पाते हैं। लेकिन अब तक दुर्भाग्य से एलियन जीवन के होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है।

यूरोपा मिशन के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक अपनी राष्ट्रीयता, अपना रंग, अपनी जाति, अपना धर्म और अपने संशय — सब भुलाकर कंधे से कंधा मिलाकर उस एक प्रतिशत संभावना को सफलता में बदलने के लिए जुटे हुए हैं। यही इंसानियत का असली सौंदर्य है।

यूरोपा मिशन हमें यह भी बताता है कि इतिहास गवाह है कि जब भी कोई ऐसा क्रांतिकारी अभियान आता है तो उस अभियान के लिए जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकसित होती है उसका फायदा इंसानी सभ्यता के सभी क्षेत्रों को सशक्त बनाने में होता है।

यूरोपा मिशन की सफलता या विफलता से परे यह अभियान इंसानी संभावना का सर्वश्रेष्ठ पहलू सामने लाएगा। और यही है जिज्ञासा की असली ताकत जो हमेशा हमारी सभ्यता को आगे धकेलती रहती है।

आपके विचार में यूरोपा मिशन के जरिए एलियन जीवन मिलने के क्या आसार हैं? नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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