हार्ट अटैक से बचें बिना ऑपरेशन के — डॉ. विमल शाह की पूरी गाइड

हार्ट अटैक से बचें बिना ऑपरेशन के — डॉ. विमल शाह की पूरी गाइड

हार्ट अटैक से बचें बिना ऑपरेशन के — डॉ. विमल शाह की पूरी गाइड

इंडिया के लाखों लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण हार्ट अटैक है। देश में हर तीन में से एक मौत दिल की बीमारी से होती है। और आज इंडियन अस्पतालों में एक ऐसा माफिया खड़ा हो चुका है जो हार्ट के मरीजों को डराकर सीधे ऑपरेशन टेबल पर भेज देता है। लेकिन डॉ. विमल शाह — इंडिया के अग्रणी हार्ट स्पेशलिस्ट — का मानना है कि ज्यादातर मामलों में हार्ट अटैक बिना किसी ऑपरेशन के रोका और ठीक किया जा सकता है। उन्होंने अब तक 4.5 लाख से अधिक मरीजों को बिना महंगी सर्जरी के ठीक किया है।

यह आर्टिकल उन्हीं के अनुभव और ज्ञान पर आधारित है। हार्ट अटैक की पूरी सच्चाई, उसके कारण, लक्षण, रोकथाम और इलाज — सब कुछ यहाँ विस्तार से समझाया गया है।

हार्ट अटैक आखिर होता क्या है

हार्ट अटैक को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि दिल काम कैसे करता है। हमारा दिल पूरे शरीर को खून पहुँचाता है। इसके लिए खुद दिल को भी खून की जरूरत होती है जो तीन कोरोनरी आर्टरीज यानी नलियों से मिलता है।

जब इन नलियों में कोलेस्ट्रॉल और चर्बी जमा होने लगती है तो ब्लॉकेज बनती है। यह ब्लॉकेज धीरे-धीरे सालों में बढ़ती है। जब तक यह 50-70 फीसदी से कम हो तब तक कोई तकलीफ नहीं होती।

लेकिन एक दिन क्या होता है? इस ब्लॉकेज के ऊपर एक पतली झिल्ली होती है। वो झिल्ली खिंचती रहती है और एक दिन फट जाती है। फटते ही वहाँ खून का थक्का यानी क्लॉट बन जाता है और नली 100 फीसदी बंद हो जाती है। उस हिस्से को खून नहीं मिलता और दिल का वो हिस्सा मर जाता है। इसी को हार्ट अटैक कहते हैं।

सडन कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में फर्क

हार्ट अटैक के अलावा एक और खतरनाक स्थिति है — सडन कार्डियक अरेस्ट। इसमें दिल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम बिगड़ जाता है और दिल की धड़कन अचानक बहुत तेज हो जाती है — इसे Ventricular Tachycardia कहते हैं। धड़कन इतनी तेज होती है कि दिल पंप करना बंद कर देता है और दिमाग तक खून नहीं पहुँचता।

कोई भी अचानक मौत — चाहे जिम में हो, खेलते हुए हो, ट्रेन में हो या सोते हुए — 99 फीसदी मामलों में दिल से ही होती है। या तो हार्ट अटैक या सडन कार्डियक अरेस्ट।

युवाओं में हार्ट अटैक क्यों बढ़ रहा है

25 से 40 साल के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले 30 फीसदी बढ़े हैं। इसके पीछे कई कारण हैं।

पहला और सबसे बड़ा कारण है बिगड़ी हुई जीवनशैली। ज्यादा चर्बी वाला खाना, शारीरिक गतिविधि का अभाव, तनाव, धूम्रपान और शराब। युवा बहुत ज्यादा फैट खा रहे हैं, तनाव में हैं और एक्सरसाइज के लिए समय नहीं निकाल पाते।

दूसरा कारण आनुवंशिक है। कुछ भारतीयों का लीवर आनुवंशिक रूप से अधिक कोलेस्ट्रॉल बनाता है। इसे माता-पिता ने दिया है — सीधे ब्लॉकेज नहीं, बल्कि वो जीवर जो डबल कोलेस्ट्रॉल बनाता है।

तीसरा कारण जो 2019-20 के बाद खासतौर पर देखा गया है वो है कोविड का संभावित असर। हालांकि इस पर पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है लेकिन ऐसा लगता है कि कोविड या कोविड वैक्सीन किसी न किसी तरह उस झिल्ली को कमजोर कर सकती है जो ब्लॉकेज के ऊपर होती है। जब झिल्ली कमजोर हो तो 40-50 फीसदी ब्लॉकेज पर भी हार्ट अटैक हो सकता है जबकि आमतौर पर यह 80-90 फीसदी पर होता था।

हार्ट अटैक के पाँच मुख्य कारण जो 95 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार हैं

डॉ. विमल शाह के अनुसार हार्ट अटैक के मुख्य कारण हैं — उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड, उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, मोटापा विशेषकर पेट का मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि का अभाव और अत्यधिक तनाव।

इनमें से सिर्फ दो-तीन कारण भी साथ आ जाएं तो हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। और सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि यह बीमारी बिना किसी लक्षण के सालों तक बढ़ती रहती है। लोगों को लगता है उन्हें कुछ नहीं था — लेकिन सच यह है कि था, बस पता नहीं चला।

हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का गहरा रिश्ता

हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहते हैं। इसकी वजह बिल्कुल सरल है। सोचिए एक नली बनाई गई है 120 के दबाव के लिए। आप उसमें 140-150 का दबाव डालते रहें तो वो नली अंदर से खुरदरी हो जाएगी। उसी खुरदरी जगह पर ब्लॉकेज सबसे पहले पकड़ती है।

इंडिया में 30 फीसदी लोगों को हाई ब्लड प्रेशर है। और जिन्हें है उनमें से आधे जानते ही नहीं। जो जानते हैं उनमें से आधे कंट्रोल नहीं करते। और जो कंट्रोल करते हैं उनमें भी आधे दवाएं ठीक से नहीं लेते।

हर उम्र में ऊपरी रक्तचाप 120 होनी चाहिए। 130 से अधिक होने पर ध्यान देना जरूरी है। यही दबाव दिल पर अतिरिक्त भार डालता है जिससे दिल की मांसपेशियाँ मोटी होती हैं और जल्दी खराब होती हैं।

पेट का माप बताता है हार्ट अटैक का खतरा

एक आसान तरीके से जाँचें कि आप खतरे में हैं या नहीं। पुरुषों में अगर कमर 34 इंच से अधिक है और महिलाओं में 32 इंच से अधिक है तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

यह सेंट्रल ओबेसिटी यानी पेट का मोटापा भारतीयों में आनुवंशिक रूप से अधिक पाया जाता है। दुनिया के किसी भी देश में भारतीय चले जाएं — उनमें वहाँ की आबादी से दोगुना हार्ट अटैक का खतरा होता है क्योंकि उनके शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड अधिक बनता है।

हार्ट अटैक के लक्षण — जब 70 फीसदी ब्लॉकेज हो जाए

हमारे दिल को जितना खून मिलता है उसका एक तिहाई भी पर्याप्त है। इसीलिए लक्षण बहुत देर से आते हैं — आमतौर पर 70-80 फीसदी ब्लॉकेज के बाद। लेकिन कुछ शुरुआती संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए।

तेज चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर सीने में दर्द या तकलीफ। किसी भी मेहनत के काम पर सांस फूलना। इसके अलावा आँखों के कोने में सफेद या पीले धब्बे — जिसे Xanthoma कहते हैं — कोलेस्ट्रॉल का एक प्रत्यक्ष संकेत है।

खाने में तेल — सबसे बड़ा जहर

डॉ. विमल शाह बहुत स्पष्टता से कहते हैं — तेल आज का सबसे बड़ा जहर है। तेल में कोई स्वाद नहीं होता। स्वाद मसालों में होता है। और मसाले पानी में भूने जा सकते हैं।

AIIMS की रिसर्च बताती है कि हर तीन में से एक भारतीय को फैटी लिवर स्टेज वन है। पहले लिवर खराब होने का सबसे बड़ा कारण शराब था। अब उसकी जगह चर्बी ने ले ली है। और यही चर्बी लिवर और दिल दोनों को एक साथ बर्बाद कर रही है।

जीरो ऑयल कुकिंग दिल और लिवर दोनों को बचाती है। पकोड़े, कचौड़ी, समोसे — सब कुछ बिना तेल के बन सकता है। एयर फ्रायर या ओवन में वही स्वाद आता है।

कार्बोहाइड्रेट और भारतीय थाली की असलियत

भारतीय खाना आज प्रमुखतः कार्बोहाइड्रेट बन चुका है। रोटी, चावल, दाल — यह सब कार्बोहाइड्रेट है। कार्बोहाइड्रेट शुद्ध कैलोरी होती है। और जितना ज्यादा रिफाइन करो उतना ज्यादा नुकसान।

इंडिया में 40 फीसदी लोग आज मोटे हैं — सिर्फ इसलिए क्योंकि कार्बोहाइड्रेट बहुत खाते हैं। छह रोटी खाने से वजन बढ़ेगा ही। उन रोटियों की जगह फल और सब्जियाँ लो। रोटी एक कर लो — वजन गिरेगा।

समाधान यह है कि जो कार्बोहाइड्रेट खाएं उसमें भरपूर सब्जियाँ मिलाएं। दाल में दोगुनी सब्जियाँ डालें। रोटी में हरी सब्जियाँ भरें। इससे कार्बोहाइड्रेट कम और फाइबर ज्यादा मिलेगा।

तनाव और हार्ट अटैक — एक खतरनाक रिश्ता

मुवीज में दिखाया जाता है कि बुरी खबर सुनकर पिताजी को हार्ट अटैक आ गया। यह सच में होता है। जब अचानक बड़ा तनाव आता है तो खून में कोर्टिसोल बढ़ता है, शुगर बढ़ती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। और उसी वक्त उस पतली झिल्ली को नुकसान पहुँचता है जो ब्लॉकेज के ऊपर होती है।

दीर्घकालिक तनाव भी उतना ही खतरनाक है। तनाव में इंसान गलत खाता है, धूम्रपान करता है, नींद कम लेता है। तनाव प्रबंधन के लिए योग और ध्यान सबसे कारगर उपाय हैं।

हार्ट अटैक रोकने का तीन-स्तरीय तरीका

डॉ. विमल शाह का कहना है कि हार्ट अटैक रोकने के लिए तीन लोगों को मिलकर काम करना होगा।

पहला डॉक्टर — जो दवाएं देकर कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, रक्तचाप और शुगर कंट्रोल करे।

दूसरा परिवार — जो खाने में तेल बंद करे, माँसाहार कम करे, सूखे मेवों की मात्रा सीमित करे, दूध से चर्बी निकाले और फल व सब्जियाँ अधिक दे।

तीसरा मरीज खुद — जो रोज टहले, योग करे, धूम्रपान और शराब छोड़े, वजन कम करे और तनाव कम ले।

जब ये तीनों मिलकर काम करें तो हार्ट अटैक होना लगभग असंभव है। उनके लाखों मरीज जिन्हें कहा गया था कल तक मर जाओगे — वो 25 साल से अधिक समय निकाल रहे हैं। क्योंकि सभी कारणों को एक साथ कंट्रोल किया गया।

एनाबोलिक स्टेरॉयड — जिम कल्चर का छुपा खतरा

Instagram संस्कृति और फिटनेस इंडस्ट्री के साथ आया एनाबोलिक स्टेरॉयड का चलन। यह मांसपेशियाँ बड़ी कर देता है लेकिन शरीर के अंदर असंतुलन पैदा करता है। ब्लड की चिपचिपाहट बढ़ाता है जिससे थक्के जल्दी बनते हैं। रक्तचाप और शुगर बढ़ाता है।

जिम में हार्ट अटैक से मौत एनाबोलिक स्टेरॉयड की वजह से नहीं होती — बल्कि इसलिए होती है क्योंकि पहले से ब्लॉकेज थी। स्टेरॉयड ने उसे और तेज कर दिया। बिना स्टेरॉयड के भी वो ब्लॉकेज थी — बस कहीं और फटती।

सबसे अच्छा प्रोटीन शेक है पाँच-छह तरह की दालें मिलाकर। एक दाल में जो अमीनो एसिड कम है दूसरी में है। सब मिलाने से पूरे अमीनो एसिड मिल जाते हैं।

इमरजेंसी में क्या करें — घर पर रखें ये तीन दवाएं

अगर किसी को अचानक बैठे-बैठे पसीना आने लगे, सीने में दर्द हो, बेचैनी हो — यह हार्ट अटैक के संकेत हैं। तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।

लेकिन जाने से पहले तीन दवाएं चबाकर पानी से लें जो घर में रखनी चाहिए — एस्पिरिन 325 मिलीग्राम, क्लोपिडोग्रेल 300 मिलीग्राम यानी 75 की चार गोलियाँ, और एटोर्वास्टेटिन 80 मिलीग्राम। ये दवाएं खून पतला करती हैं और थक्के को घोलने में मदद करती हैं। इससे अस्पताल पहुँचने तक नुकसान कम होगा।

जिनके घर में हृदय रोगी हों या पारिवारिक इतिहास हो उन्हें ये दवाएं जरूर रखनी चाहिए।

ब्लॉकेज पहले से जानें — सीटी कोरोनरी स्कैन

अगर हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज करते हैं — जिम, मैराथन, स्क्वैश — तो पहले सीटी कोरोनरी स्कैन करवा लें। इससे पता चलता है कि कौन सी नली में कितनी ब्लॉकेज है। महज 5-6 हजार रुपये में 5 मिनट में ब्लॉकेज की पूरी स्थिति सामने आ जाती है।

अगर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड अधिक है, या पारिवारिक इतिहास है, तो यह स्कैन एकदम जरूरी है। स्ट्रेस टेस्ट और ECG सिर्फ 70-80 फीसदी ब्लॉकेज बाद ही दिखाते हैं। Echocardiogram ब्लॉकेज नहीं बताता — सिर्फ दिल की संरचना और पंपिंग बताता है।

हार्ट अस्पताल का माफिया — डर से कमाई

डॉ. विमल शाह खुलकर बताते हैं कि बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों में हार्ट का एक माफिया खड़ा हो चुका है। एंजियोग्राफी में तार घुसाई जाती है जो खुद एक छोटी सर्जरी है। और जैसे ही 70-80-90 फीसदी ब्लॉकेज दिखती है तो मरीज को डरा दिया जाता है — “आज नहीं कल तक नहीं बचोगे।”

पहले स्टेंट 1.5 से 2 लाख में बिकता था जिसकी असल कीमत 10 हजार थी। सरकार ने 3000 रुपये की सीमा लगाई तो अस्पतालों ने “लगाने का खर्च” 1.5 लाख कर दिया।

एक शोध बताता है कि अगर डॉक्टर का वेतन ऑपरेशन पर निर्भर न हो तो आधे ऑपरेशन की जरूरत ही नहीं होती।

नेचुरल बायपास — बिना चीर-फाड़ दिल में नई नली

दिल में भगवान ने एक बैकअप व्यवस्था दी है — Collateral Vessels। ये छोटी-छोटी नलियाँ होती हैं जो दिल की मुख्य नलियों के साथ जुड़ी होती हैं। जब कोई खिलाड़ी रोज दौड़ता है तो ये बैकअप नलियाँ खुल जाती हैं और एक प्राकृतिक बायपास बन जाता है।

हार्ट के मरीजों के लिए EECP मशीन यही काम करती है। मरीज को लेटाकर पैरों में जैकेट्स लगाए जाते हैं। मशीन हर बार दिल की धड़कन के साथ पैरों को दबाती है जिससे दिल को अतिरिक्त खून मिलता है और बैकअप नलियाँ खुल जाती हैं। 40 दिन में एक घंटे रोज। बिना किसी चीरे के, बिना किसी सर्जरी के, दिल में नई नली बन जाती है।

यह अमेरिकी FDA से मान्यता प्राप्त इलाज है और भारत में कई बीमा कंपनियाँ इसका खर्च देती हैं।

आयुर्वेद और होम्योपैथी — कितनी उपयोगी

डॉ. शाह कहते हैं कि आयुर्वेद और होम्योपैथी नुकसान नहीं करते। अर्जुन की छाल हार्ट के लिए प्रमाणित रूप से लाभकारी है। एक छोटा टुकड़ा रात को पानी में भिगोएं और सुबह पानी पीएं।

लेकिन इन्हें एलोपैथी के साथ जोड़कर लेना चाहिए, इनके भरोसे मुख्य दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए। रक्तचाप और शुगर की दवाएं बंद करना खतरनाक हो सकता है।

LDL कोलेस्ट्रॉल का नया लक्ष्य — 50 मिलीग्राम

ताजा शोध कहता है कि LDL कोलेस्ट्रॉल को 50 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक लाना चाहिए — पहले यह 100 था, फिर 70 और अब 50। इसका मतलब है खाने में सारी चर्बी बंद करनी होगी और अगर जरूरत हो तो दवाएं लेनी होंगी।

अच्छी खबर यह है कि आज ऐसे इंजेक्शन आ गए हैं जो छह महीने तक कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखते हैं — एक इंजेक्शन, छह महीने की राहत।

हार्ट को मजबूत बनाने वाले प्राकृतिक सुपरफूड

कोई आर्टिफिशियल सुपरफूड नहीं — फल, सब्जियाँ, अर्जुन की छाल, इलायची, दालचीनी और एप्पल साइडर विनेगर। ये प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं जो रक्त वाहिकाओं की झिल्ली को मजबूत करते हैं।

होमोसिस्टीन कम करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल और दही जैसे प्रोबायोटिक फूड लें। अगर आनुवंशिक कारण हो तो फोलिक एसिड सप्लीमेंट लें।

अंत में — ज्ञान ही सबसे बड़ी दवा

अंधेरे में इंसान डरता है। जैसे ही रोशनी जलती है डर दूर हो जाता है। हार्ट की बीमारी का यही हाल है। जब लोग यह जान लेते हैं कि ब्लॉकेज क्यों बनती है, कैसे बढ़ती है और कैसे रोकी जाए — तो अस्पताल का डर खत्म हो जाता है।

हार्ट की बीमारी एक स्व-निर्मित बीमारी है। हमने खुद बनाई है — गलत खाने से, तनाव से, आलस से। और हम खुद ही इसे रोक सकते हैं।

शिक्षा पहले, फिर रोकथाम और जरूरत पड़े तो डबल सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य बीमा। यही तीन कदम हर भारतीय परिवार को हार्ट अटैक से बचा सकते हैं।

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