सेलिब्रिटी ब्रांड्स क्यों फेल होते हैं? HRX से सीखें सफलता का राज
आपने पिछले कुछ सालों में एक पैटर्न जरूर नोटिस किया होगा। जब भी कोई बड़ा सेलिब्रिटी अपना ब्रांड लॉन्च करता है तो कुछ दिनों तक पूरा इंटरनेट उसी सेलिब्रिटी ब्रांड का सेल्समैन बन जाता है। Instagram स्क्रॉल करो, YouTube खोलो, न्यूज देखो, WhatsApp स्टेटस देखो — हर जगह वही सेलिब्रिटी ब्रांड दिखाई देता है। और शुरुआत में हमें भी लगता है कि इतना बड़ा सेलिब्रिटी है, करोड़ों फॉलोवर्स हैं तो सेलिब्रिटी ब्रांड हिट होना ही चाहिए।
लेकिन हाइप के बाद क्या होता है? यही सबसे इंटरेस्टिंग सवाल है।
पिछले कुछ सालों में इंडिया के सबसे बड़े सेलिब्रिटीज ने एक के बाद एक सेलिब्रिटी ब्रांड लॉन्च किए। अनुष्का शर्मा ने फैशन सेलिब्रिटी ब्रांड बनाया। दीपिका पादुकोण स्किनकेयर में आईं। सोनम कपूर ने क्लोथिंग लाइन लॉन्च की। विराट कोहली ने रॉन्ग बनाया। लेकिन हाइप के बाद के नंबर देखें तो हैरत होती है।
अनुष्का का सेलिब्रिटी ब्रांड नुश लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद कंट्रोवर्सी में फंस गया और आज उनकी वेबसाइट तक एक्सिस्ट नहीं करती। सोनम कपूर का सेलिब्रिटी ब्रांड रेशो 2020 के बाद Instagram पर बिल्कुल साइलेंट हो गया। शाहिद कपूर का स्कल्ट जिस प्लेटफॉर्म के साथ लॉन्च हुआ था वो प्लेटफॉर्म ही बंद हो गया। दीपिका पादुकोण का सेलिब्रिटी ब्रांड 82° पिछले साल 25 करोड़ रुपये के घाटे में था। और विराट कोहली जैसा मैसिव सेलिब्रिटी फेस होने के बावजूद रॉन्ग का रेवेन्यू 29 फीसदी नीचे गिर गया।
इन लोगों के पास पैसे की कोई कमी नहीं थी। कनेक्शन भी थे और फॉलोवर्स भी। फिर भी सेलिब्रिटी ब्रांड्स या तो संघर्ष कर रहे हैं या बाजार से गायब हो गए।
स्टोरीबोर्ड18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया के सेलिब्रिटी फैशन और ब्यूटी ब्रांड्स में से 80 फीसदी या तो घाटे में हैं, बंद हो चुके हैं या किसी बड़ी कंपनी ने खरीद लिए हैं।
सेलिब्रिटी ब्रांड लॉन्च करने की असली वजह
सेलिब्रिटी ब्रांड की सफलता और असफलता को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि हर बड़ा सेलिब्रिटी आखिर खुद का सेलिब्रिटी ब्रांड क्यों लॉन्च करना चाहता है।
जब विराट कोहली एक मैच से करोड़ों रुपये कमा सकते हैं और दीपिका एक फिल्म से करोड़ों चार्ज कर सकती हैं तो खुद का बिजनेस बनाने की जरूरत ही क्या है?
जवाब सीधा है। सेलिब्रिटी की फेम हमेशा एक जैसी नहीं रहती। एक फ्लॉप फिल्म आ जाए, इंजरी हो जाए, रिटायरमेंट आ जाए — धीरे-धीरे लोगों का ध्यान दूसरी तरफ शिफ्ट होने लगता है। जो ब्रांड्स आज करोड़ों देकर एंडोर्समेंट करा रहे हैं वही कुछ साल बाद शायद इंटरेस्ट भी न दिखाएं। ऐसे में खुद का सेलिब्रिटी ब्रांड होना एक बैकअप है जो सिर्फ मौजूदा पॉपुलेरिटी पर निर्भर नहीं करता।
दूसरी वजह है पैसिव इनकम। सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट में एक बार शूट करो, पैसे लो और बात खत्म। लेकिन खुद के सेलिब्रिटी ब्रांड में हर बिक्री पर पैसा आता है। इरादा गलत नहीं होता। प्रॉब्लम तब शुरू होती है जब सेलिब्रिटी सोचता है — फॉलोवर्स हैं, फेम है, ब्रांड लॉन्च कर देते हैं, चल जाएगा।
पहली बड़ी गलती — प्रोडक्ट से पहले पीआर
सेलिब्रिटी ब्रांड्स की सबसे पहली और सबसे बड़ी गलती है प्रोडक्ट से पहले पीआर बिल्ड कर देना। बाजार में सेलिब्रिटी ब्रांड का प्रोडक्ट साबित नहीं हुआ होता लेकिन उससे पहले इतना शोरशराबा होता है कि ग्राहक को लगता है कोई बड़ी चीज आने वाली है।
अनुष्का शर्मा का सेलिब्रिटी ब्रांड नुश इसका सबसे साफ उदाहरण है। यह सेलिब्रिटी ब्रांड 2017 में लॉन्च हुआ। लेकिन लॉन्च के कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट वायरल होने लगे कि नुश के डिजाइन AliExpress के चीनी प्रोडक्ट से एकदम एक जैसे थे। सेलिब्रिटी ब्रांड को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना पड़ा और जो भरोसा था वो एक झटके में खत्म हो गया।
यही पीआर-फर्स्ट मॉडल का सबसे बड़ा खतरा है। मार्केटिंग ग्राहक को पहली बार तो ला सकती है लेकिन प्रोडक्ट उस ग्राहक को बार-बार वापस लाता है। अगर सेलिब्रिटी ब्रांड का प्रोडक्ट बेकार हुआ तो ग्राहक अगली बार किसी दूसरे सेलिब्रिटी ब्रांड पर चला जाएगा।
K ब्यूटी ने क्या किया अलग
इसी बाजार में कैटरीना कैफ का K ब्यूटी सेलिब्रिटी ब्रांड एक अलग तस्वीर पेश करता है। 2019 के आसपास इंडिया का मेकअप बाजार एक अजीब मोड़ पर था। अच्छी शेड्स और प्रीमियम क्वालिटी चाहिए तो MAC या बॉबी ब्राउन जैसे महंगे सेलिब्रिटी ब्रांड की तरफ जाना पड़ता था। किफायती विकल्प तो थे लेकिन भारतीय स्किन टोन के हिसाब से उतनी वैरायटी या क्वालिटी नहीं मिलती थी।
K ब्यूटी ने इसी गैप को पकड़ा। इस सेलिब्रिटी ब्रांड से कैटरीना का नाम हटा दें तो भी प्रोडक्ट के एक्सिस्ट करने की एक असली वजह बचती है। K ब्यूटी इसलिए चला क्योंकि सेलिब्रिटी फेस के पीछे प्रोडक्ट में असली वैल्यू थी। पिछले साल 28 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में 11 करोड़ रुपये मुनाफा — यही फर्क है।
फॉलोवर्स और ग्राहक — सेलिब्रिटी ब्रांड्स की सबसे बड़ी गलतफहमी
सेलिब्रिटी ब्रांड्स की एक और बड़ी गलतफहमी है — फॉलोवर्स को ग्राहक समझ लेना।
सोचिए आप किसी एक्टर या एक्ट्रेस को Instagram पर क्यों फॉलो करते हैं? उनकी लाइफस्टाइल एंजॉय करने के लिए। यहाँ आपका इरादा एंटरटेनमेंट है, शॉपिंग नहीं। लेकिन वो सेलिब्रिटी यह मान लेता है कि करोड़ों फॉलोवर्स हैं तो वो उनके सेलिब्रिटी ब्रांड के प्रोडक्ट भी खरीदेंगे।
सोनम कपूर के सेलिब्रिटी ब्रांड रेशो के साथ ठीक यही हुआ। जो लोग सोनम की लग्जरी आउटफिट्स को देखकर तारीफ करते थे वो दो से तीन हजार रुपये के प्रोडक्ट भी नहीं खरीदे। 2020 के बाद रेशो का Instagram ही साइलेंट हो गया।
यही सबसे बड़ा फर्क है फैन और ग्राहक में। फैन आता है भावना से — लेकिन ग्राहक आता है हिसाब से। आपका फैन आपकी पोस्ट को लाइक कर सकता है, कमेंट कर सकता है — यह सब मुफ्त है। लेकिन ग्राहक जेब से पैसे निकालता है और तब वो सेलिब्रिटी नहीं बल्कि वैल्यू देखता है।
प्रीमियम प्राइसिंग और असली वैल्यू का फर्क
कई सेलिब्रिटी ब्रांड्स एक और गलतफहमी में रहते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उन्हें लग्जरी लाइफस्टाइल में देखते हैं इसलिए महंगा प्रोडक्ट भी खरीद लेंगे। और फिर ऐसा सेलिब्रिटी ब्रांड प्रोडक्ट लॉन्च होता है जिसकी कीमत तो प्रीमियम लगती है लेकिन असली वैल्यू उतनी होती नहीं।
दीपिका पादुकोण का सेलिब्रिटी ब्रांड 82° सबसे साफ उदाहरण है। 2022 में लॉन्च हुए इस सेलिब्रिटी ब्रांड में मॉइस्चराइजर 2500 रुपये का था और फेस ऑयल 2900 रुपये का। लेकिन इंग्रेडिएंट्स वही थे जो Minimalist जैसे सेलिब्रिटी ब्रांड 500 रुपये से कम में दे रहे थे। ग्राहकों ने तुलना की और देखा कि दूसरे ब्रांड्स कम पैसों में लगभग वही चीज दे रहे हैं। धीरे-धीरे लोगों को लगने लगा कि यहाँ प्रोडक्ट से ज्यादा सेलिब्रिटी के नाम और फैंसी पैकेजिंग का पैसा लिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024 में करीब 25 करोड़ रुपये का घाटा — यही नतीजा रहा।
लेकिन प्रीमियम प्राइसिंग हमेशा गलत नहीं होती। HRX की टीशर्ट 500 से 1000 रुपये में है और जूते 1500 से 3000 तक। यह सस्ता नहीं है। लेकिन लोगों ने इस सेलिब्रिटी ब्रांड की यह कीमत स्वीकार की। क्योंकि वहाँ मॉइस्चर विकिंग फैब्रिक था, फोर-वे स्ट्रेच मटेरियल था और फ्लैट-लॉक सीम्स थे — ऐसे फीचर्स जो नॉर्मली Nike और Adidas जैसे जूतों में मिलते हैं जो 3 से 5 हजार के बीच आते हैं। ग्राहकों को तुरंत समझ आ गया कि एक्स्ट्रा पैसे किस चीज के लिए जा रहे हैं।
सेलिब्रिटी ब्रांड की असली परीक्षा लॉन्च के छह महीने बाद
सेलिब्रिटी ब्रांड्स की सबसे बड़ी समस्या शायद यही है जो ज्यादातर लोग नोटिस नहीं करते। शुरुआत में सब कुछ सही लगता है — हाइप है, बिक्री आती है, कवरेज मिलती है। लेकिन असली प्रॉब्लम छह महीने बाद आती है जब सेलिब्रिटी ब्रांड धीरे-धीरे साइलेंट होने लगता है।
लॉन्च बस एक दिन या एक हफ्ते का इवेंट होता है। लेकिन सेलिब्रिटी ब्रांड चलाना रोज का काम है। रोज इन्वेंटरी देखनी है, ग्राहकों की शिकायतें हैंडल करनी हैं, नए प्रोडक्ट लाने हैं, क्वालिटी बनाए रखनी है, सप्लायर मैनेज करने हैं। यही वो जगह है जहाँ सेलिब्रिटी ब्रांड्स टूटने लगते हैं।
क्योंकि सेलिब्रिटी के लिए सेलिब्रिटी ब्रांड मुख्य करियर नहीं होता। फिल्में, क्रिकेट, शूट्स, एंडोर्समेंट — यही उनका असली काम है।
शाहिद कपूर का सेलिब्रिटी ब्रांड स्कल्ट इसका साफ उदाहरण है। 2016 में यह सेलिब्रिटी ब्रांड Abof प्लेटफॉर्म के साथ लॉन्च हुआ। उस वक्त शाहिद का क्रेज भी काफी तगड़ा था और इंडिया में एथलेजर ब्रांड तेजी से बढ़ रहे थे। लेकिन उसी दौर में शाहिद की एक्टिंग करियर पीक पर थी — पद्मावत, कबीर सिंह जैसी बड़ी फिल्में आ रही थीं। स्वाभाविक रूप से उनका ज्यादातर फोकस फिल्मों पर रहा। 2017 में Abof खुद बंद हो गया क्योंकि Amazon और Flipkart से मुकाबला नहीं कर सका। और इस प्लेटफॉर्म के साथ सेलिब्रिटी ब्रांड स्कल्ट भी डूब गया।
सोनम कपूर के सेलिब्रिटी ब्रांड रेशो के साथ भी यही हुआ। शुरुआत में कलेक्शन थे, कैम्पेन हो रहे थे, एनर्जी भी थी। फिर सोनम लंदन शिफ्ट हो गईं, प्राथमिकताएं बदल गईं और सेलिब्रिटी ब्रांड की गतिविधि धीरे-धीरे कम होती चली गई।
HRX ने क्या अलग किया — सेलिब्रिटी ब्रांड की असली सफलता का राज
HRX ने इसका उल्टा रास्ता अपनाया। ऋत्विक रोशन ने सेलिब्रिटी ब्रांड की हर चीज खुद कंट्रोल करने की कोशिश नहीं की। मैन्युफैक्चरिंग, डिलीवरी, इन्वेंटरी, ग्राहक सपोर्ट — यह सब Myntra जैसी अनुभवी कंपनी को हैंडल करने दिया। और खुद वो किया जिसमें वो स्वाभाविक रूप से मजबूत थे — फिटनेस इमेज बनाए रखना, कैम्पेन करना और सेलिब्रिटी ब्रांड को रिप्रेजेंट करना।
रितिक बस चेहरा बने रहे और पीछे असली बिजनेस एक्सपर्ट्स सेलिब्रिटी ब्रांड चला रहे थे। यही वजह है कि HRX सिर्फ लॉन्च हाइप तक सीमित नहीं रहा बल्कि सच में बड़ा सेलिब्रिटी ब्रांड बन गया। 2024 में HRX ने 1000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू पार किया।
इंडिया को समझना — सेलिब्रिटी ब्रांड्स की सबसे बड़ी चूक
इन सबसे भी बड़ी प्रॉब्लम है बाजार की समझ। इंडिया के ज्यादातर सेलिब्रिटी ब्रांड्स ने देश में सेलिब्रिटी ब्रांड तो बनाया लेकिन इंडिया को असल में समझा ही नहीं।
जब भी कोई सेलिब्रिटी ब्रांड लॉन्च होता है तो दिखता कहाँ है? Instagram पर, इन्फ्लुएंसर्स के पास, YouTube एड्स में और मेट्रो शहरों के मॉल्स में। यानी पूरा सेलिब्रिटी ब्रांड टियर-वन शहरों में बढ़ता है और सेलिब्रिटी को लगता है कि यही असली इंडिया है। लेकिन इंडिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार वहाँ है ही नहीं।
इंडिया की ज्यादातर आबादी टियर-2, टियर-3 शहरों और छोटे कस्बों में रहती है। यही लोग असली स्केल बनाते हैं। लेकिन ज्यादातर सेलिब्रिटी ब्रांड्स कभी वहाँ पहुँचते ही नहीं।
HRX ने यह समझ लिया था। Myntra की साझेदारी सिर्फ लॉजिस्टिक्स की डील नहीं थी। उस वक्त Myntra आक्रामक तरीके से टियर-2 और टियर-3 शहरों में फैल रहा था और HRX उसी लहर के साथ पूरे इंडिया में पहुँच गया।
एक छोटे शहर का लड़का जो फिटनेस में रुचि रखता है, जिम जाना शुरू कर रहा है लेकिन Nike या Adidas नहीं खरीद सकता — उसके लिए HRX सेलिब्रिटी ब्रांड एस्पिरेशनल भी था और किफायती भी। इसीलिए शुरुआती दौर में ही HRX ने सैकड़ों करोड़ का रेवेन्यू बनाया।
इंडिया में स्केल हाइप से नहीं आता। वो आता है डिस्ट्रीब्यूशन से, पहुँच से, टियर-2 और टियर-3 शहरों की स्वीकृति से।
इंडिया का उपभोक्ता बाजार — जितना दिखता है उससे कम है
एक और सच्चाई जो ज्यादातर सेलिब्रिटी ब्रांड्स नहीं समझते — इंडिया एक बड़ा बाजार जरूर है लेकिन भुगतान करने वाले ग्राहक उतने नहीं हैं जितने होने चाहिए।
अमेरिका में ब्यूटी और पर्सनल केयर का पूरा बाजार लगभग 105 बिलियन डॉलर का है। वहाँ की आबादी सिर्फ 35 करोड़। जबकि इंडिया में ब्यूटी और पर्सनल केयर का बाजार लगभग 33 बिलियन डॉलर का है। यहाँ की आबादी 140 करोड़ — यानी चार गुना आबादी लेकिन बाजार का आकार एक तिहाई।
इसका मतलब यह है कि एक सेलिब्रिटी ब्रांड लॉन्च होने के बाद एक बिंदु आता है जहाँ ग्रोथ अपने आप धीमी हो जाती है क्योंकि बाजार उतनी गहरी होती ही नहीं।
ऊपर से इंडिया में एक दिलचस्प पैटर्न है — लोग कैटेगरी के हिसाब से वफादार होते हैं, सेलिब्रिटी ब्रांड के हिसाब से नहीं। शैम्पू किसी एक ब्रांड का, फेस वॉश किसी दूसरे का और साबुन किसी तीसरे का। हर कैटेगरी में अलग फैसला होता है। जो सेलिब्रिटी यह सोचता है कि उसका नाम इतना बड़ा है कि लोग हर कैटेगरी में उसे फॉलो करेंगे — वो इंडिया के उपभोक्ता को गलत समझ रहा है।
आलिया का एडवामा — सेलिब्रिटी ब्रांड जिसे Reliance ने खरीदा
इसी बाजार में आलिया भट्ट का सेलिब्रिटी ब्रांड एडवामा इतनी तेजी से बढ़ा कि Reliance Retail ने उसे खरीद लिया। कैसे? क्योंकि इस सेलिब्रिटी ब्रांड ने एक असली गैप पहचाना, प्रोडक्ट में असली वैल्यू रखी और बाजार को सही तरीके से समझा।
सेम देश, सेम दर्शक, सेम समय — एक तरफ सेलिब्रिटी ब्रांड्स खत्म होते जा रहे हैं और दूसरी तरफ 1000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू।
चार सवाल जो हर सेलिब्रिटी ब्रांड के लॉन्च पर पूछने चाहिए
अगली बार जब कोई सेलिब्रिटी ब्रांड बड़ी हाइप के साथ लॉन्च हो तो बस चार सवाल याद रखें।
पहला — क्या यह सेलिब्रिटी सच में उस कैटेगरी में फिट बैठता है या बस बाजार गर्म देखकर कूद पड़ा है? दूसरा — अगर इस सेलिब्रिटी ब्रांड से सेलिब्रिटी का नाम हटा दो तो क्या लोग इसे फिर भी खरीदेंगे? तीसरा — लॉन्च के कुछ महीने बाद जाकर देखो कि सेलिब्रिटी ब्रांड अभी भी सीरियसली चल रहा है या बस शुरुआती हाइप थी? चौथा — इस सेलिब्रिटी ब्रांड के प्रोडक्ट में ऐसा क्या अलग है जो बाकी ब्रांड्स नहीं दे रहे?
अगर इन चारों का जवाब ठोस है तो सेलिब्रिटी ब्रांड में सच में दम है। वरना आजकल इंटरनेट पर हाइप बनाना मुश्किल नहीं होता।
सेलिब्रिटी ब्रांड्स की कहानी यही सिखाती है — चेहरा ध्यान खींच सकता है लेकिन ब्रांड सिर्फ प्रोडक्ट की असली वैल्यू से जिंदा रहता है।
